दिल्ली सरकार ने 20 अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करवाने के लिए 42 लाख रुपये खर्च किए थे। विज्ञापन लोगों में यह भ्रम फैलाने के लिए दिए थे कि एमसीडी पर दिल्ली सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।
यह दलील शनिवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष रखी गई। कड़कड़डूमा अदालत के मुख्य महानगर दंडाधिकारी मुनीश मड़कन के समक्ष याची ने आरटीआई का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार से प्राप्त जानकारी के मुताबिक सरकार ने 30 अक्तूबर 2015 को विज्ञापन प्रकाशित करवाने के लिए अखबारों को 42,01,405 रुपये का भुगतान किया था।
याची के वकील बृजेश शुक्ला ने अपनी दलीलों में कहा कि सरकार ने जनता के पैसे की बर्बादी की और लोगों को भ्रमित किया। पेश मामले में शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अमानत में खयानत की धारा में मुकदमा दर्ज करने का निर्देश भजनपुरा थाना एसएचओ को देने की मांग की है।