केंद्र के साथ सीधे टकराव का प्लेटफार्म अरविंद केजरीवाल की टीम ने तैयार कर लिया है। ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत तमाम मामलों में उपराज्यपाल की शक्ति बढ़ाने वाली नई अधिसूचना को रद्दी की टोकरी में डालने की तैयारी है।
100 दिन पर जनसंवाद और विधानसभा के विशेष सत्र में सरकार के काम में अड़चन डालने के लिए केंद्र को विलेन साबित करने की कोशिश होगी। 21 मई 2015 की अधिसूचना को संविधान व लोकतंत्र के खिलाफ बताकर उसे न मानने का प्रस्ताव भी 26-27 मई के विशेष सत्र में पास किए जाने की संभावना है।
केंद्र सरकार ने जमीन, कानून व्यवस्था और पुलिस के अलावा सर्विसेज पर अधिकार जमाने वाली जो अधिसूचना जारी की है, उसमें कई पूर्व सॉलीसिटर जनरल और एडिशनल सॉलीसिटर जनरल की राय आई है।
उनके मुताबिक, ये गैर कानूनी और असंवैधानिक है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र की अधिसूचना का मजमून जनता को समझाने की कोशिश की जाएगी। इस मुद्दे को सेंट्रल पार्क में होने वाली ओपन कैबिनेट से रखकर जन माहौल बनाने के प्रयास होंगे।