आम आदमी पार्टी (आप) में छिड़े लेटर वार के बीच टीम केजरीवाल आर-पार के मूड में है। लगातार लीक हो रही चिट्ठियों से साफ है कि सुलह-समझौते के सारे रास्ते बंद हो गए हैं। 4 मार्च को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में विरोधियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। हालांकि, टीम केजरीवाल की कोशिश है कि लड़ाई अरविंद केजरीवाल बनाम प्रशांत भूषण/ योगेंद्र यादव न होने पाए। इसकी जगह विरोध विचारधारा का दिखाया जाए।
पार्टी नेताओं को इसमें ज्यादा सियासी नुकसान भी नहीं दिख रहा है। मौजूदा कलह का दिल्ली की सरकार पर असर नहीं पड़ेगा। फिर, पार्टी को अभी किसी दूसरे राज्य में चुनाव भी नहीं लड़ना है। वहीं, पार्टी अब भी वैचारिक स्तर पर बंटी दिखती है। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के कई बयानों पर पार्टी के भीतर काफी विरोध है।
मसलन, प्रशांत भूषण की जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की राय। केजरीवाल समेत कई नेता इससे इत्तेफाक नहीं रखते। इसके अलावा संसदीय चुनाव के बाद प्रशांत भूषण ने कई नेताओं से निजी बातचीत में केजरीवाल के खिलाफ बातें की।