इससे पहले करीब तीन बजे मुख्यमंत्री ने अपने आवास से सभी मंत्रियों व विधायकों के साथ उपराज्यपाल कार्यालय की तरफ कूच किया। सिविल लाइंस के फ्लैग स्टाफ से उपराज्यपाल कार्यालय की दो किलोमीटर की दूरी तय करने में मुख्यमंत्री और विधायकों को कुल 32 मिनट का समय लगा, लेकिन जब वे उपराज्यपाल से मिलने के लिए पहुंचे, तो वहां सबको भीतर जाने से रोक दिया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सिर्फ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मंत्री मुलाकात के लिए अंदर जा सकते हैं। पुलिस अधिकारी के रोकने पर अरविंद केजरीवाल ने खरी-खोटी सुनाई। पहले से सभी का अप्वाइंटमेंट न होने की बात केजरीवाल से कही।
इस पर केजरीवाल ने कहा कि अगर नहीं भी लिया है, तो भी उपराज्यपाल को विधायकों से मिलना होगा। फिर, सभी विधायकों को मौके पर बैठ जाने की बात कहते हुए केजरीवाल खुद भी धरने पर बैठ गए।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री सभी मंत्रियों के साथ उपराज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं, लेकिन केजरीवाल ने यह कहते हुए मिलने से मना कर दिया कि सभी विधायक आम जनता के प्रतिनिधि हैं, लिहाजा सभी को मिलने के लिए बुलाया जाना चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि विधायकों के साथ वह यहां अपने काम के लिए नहीं आए थे। उपराज्यपाल के पास अपने बच्चों की नौकरी लगवाने नहीं आए थे। हम पूरी दिल्ली की महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा करने आए थे। उपराज्यपाल ने विधायकों से मुलाकात न करके दिल्ली की पूरी जनता का अपमान किया है।
आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों व मंत्रियों के साथ धरने पर बैठे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रदर्शन को उपराज्यपाल ने दिल्ली की जनता को भ्रमित करने की कोशिश करार दिया है।
उपराज्यपाल कार्यालय की तरफ से एक बार फिर दोहराया गया है कि उपराज्यपाल के पास सीसीटीवी कैमरे का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। मुख्यमंत्री बिना किसी वजह धरना दे रहे हैं।
उपराज्यपाल कार्यालय की तरफ से बताया गया कि उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री, उनके कैबिनेट सहयोगियों व राज्यसभा के सांसदों को मुलाकात के लिए बुलाया था, लेकिन संवाद करने की जगह मुख्यमंत्री ने धरने पर बैठना ज्यादा बेहतर समझा। हालांकि, मुख्यमंत्री को एक दिन पहले ही बता दिया गया था कि उन्होंने दिल्ली सरकार के कैमरे लगाने की योजना में देरी करने या रोकने का कोई निर्देश नहीं दिया है।
उपराज्यपाल कार्यालय ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उपराज्यपाल पर सीसीटीवी कैमरों को लगाने की योजना को किसी तथ्य व सबूतों के बिना मुख्यमंत्री आरोप लगा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने वास्तविक तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया है। यहां तक कि उनकी कैबिनेट ने अभी तक सीसीटीवी लगाने के किसी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। बगैर कैबिनेट की मंजूरी के उपराज्यपाल के पास प्रस्ताव भेजने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
उपराज्यपाल की तरफ से कहा गया है कि गृह विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को सफलता से लागू करने का मानक तैयार करेगी। मुख्यमंत्री महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को अनदेखा कर रहे हैं।
उपराज्यपाल ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल से मुलाकात करने से मना कर दिया है। बावजूद इसके वह मुख्यमंत्री से मिलकर इस मसले पर चर्चा करना चाहते हैं।
पुलिस की तरफ से विधायकों संग राजनिवास में जाने से मना करने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में पुलिस का इस्तेमाल कायर करते हैं। बहादुर संवाद करने से नहीं डरते। उपराज्यपाल की तरफ से सिर्फ दिल्ली सरकार व सांसदों से मुलाकात करने के संदेश को केजरीवाल ने दिल्ली की जनता का अपमान बताया।
केजरीवाल ने कहा कि देश में संविधान है, कानून है। उपराज्यपाल को चुने हुए लोगों से मिलना पड़ेगा। यह विधायकों के सम्मान का सवाल नहीं है। विधायक तो बहुत छोटे लोग हैं, लेकिन यह दिल्ली की जनता के सम्मान का सवाल है। विधायक अपने लिए कुछ मांगने नहीं आए थे। वह सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए आए थे।
केजरीवाल ने कहा कि पिछले दो साल से उन्होंने अपनी विधानसभा में एमएलए फंड से सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। यह पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर था। योजना थी कि इसी मॉडल पर पूरी दिल्ली में कैमरे लगवाए जाएंगे, लेकिन आज एनडीएमसी ने आदेश जारी किया है कि अब इस इलाके में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगेंगे। केजरीवाल ने कहा कि अब इस मसले को जनता के बीच ले जाया जाएगा।
धरने पर बैठे आप विधायकों ने उपराज्यपाल के खिलाफ नारेबाजी की। इस मौके पर मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री व विधायक सोशल मीडिया पर अपडेट देते रहे। केजरीवाल ने अपना मनपसंद गाना ‘इंसान का इंसान से हो भाईचारा’ भी गाया।
उपराज्यपाल ने किया ट्वीट
उपराज्यपाल ने ट्वीट किया कि मुख्यमंत्री ने मुलाकात करने की जगह प्रदर्शन करना बेहतर समझा। इस पर केजरीवाल ने कहा कि यह प्रदर्शन नहीं था। पूर्व सूचना देकर वह मिलने गए थे। सभी विधायकों के साथ तीन घंटे तक सड़क पर इंतजार किया। लोकतंत्र में यह सोचा नहीं जा सकता है कि उपराज्यपाल मुलाकात करने से मना कर देंगे। उपराज्यपाल का कर्तव्य है। जनप्रतिनिधियों के साथ आम लोगों से भी मिलना ही होगा। अगर सीसीटीवी का कोई प्रस्ताव नहीं है तो कमेटी का गठन क्यों किया गया। मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल के ट्वीट पर लिखा ‘सर! 3 घंटे तक मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक आपके दफ्तर के सामने सड़क पर बैठे रहे, आप मिल लेते तो क्या बिगड़ जाता? आपने कमेटी बनवाकर एनडीएमसी एरिया में सीसीटीवी कैमरे का काम रुकवा दिया, जबकि पिछले 3 साल से वहां हजारों सीसीटीवी कैमरे आरडब्ल्यूए की सलाह पर लगे हैं’।