क्या प्रचंड बहुमत से दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल फिर अपना सरकारी निवास उस दिल्ली में बनाएंगे जो सीधे सीधे केंद्र के अधीन है?
या केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री के अधिकृत सरकारी निवास 33 शामनाथ मार्ग जो दिल्ली सरकार की ही संपत्ति है और दिल्ली सरकार के अधीन वाले इलाके में है। इस बंगले में रहकर क्या केजरीवाल उस अंधविश्वास को तोड़ेंगे जो इस विशाल बंगले को लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों में फैला हुआ है।
इस विशाल बंगले को अभागा मानकर कोई मुख्यमंत्री, मंत्री या अधिकारी इसमें रहना नहीं चाहता है और फिलहाल इसे अतिथि गृह के रूप में बनाए रखा गया है। दिल्ली विधानसभा भवन के बेहद करीब स्थित शामनाथ मार्ग पर यह बंगला शुरु से ही दिल्ली के मुख्यमंत्री का अधिकारिक निवास बनाया गया।
क्या भुतहा बंगला है दिल्ली का आधिकारिक CM आवास?
1993 में जब मदनलाल खुराना दिल्ली के मुख्यमंत्री बने तो वह इसमें रहने आ गए। लेकिन हवाला कांड के चक्कर में खुराना को बीच में ही इस्तीफा देना पड़ा। उनके बाद साहिब सिंह वर्मा मंत्री बने और उन्होंने इसे मुख्यमंत्री का अतिथिगृह बनाकर इसका उपयोग शुरु किया।
वर्मा पास के ही दूसरे बंगले में पहले से ही रहते थे जो उन्हें बतौर मंत्री मिला था। लेकिन अपना कार्यकाल पूरा होने से दो तीन महीने पहले ही वर्मा को भी हटना पड़ा। बाद में वह केंद्रीय मंत्री बने और कुछ वर्षों बाद सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया। तबसे इस बंगले को अभागा और भुतहा कहा जाने लगा।
1998 में जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनीं तो वह एक दिन के लिए भी इस बंगले में नहीं गईं और उन्होंने अपना आवास सरकारी नई दिल्ली इलाके में बनाया। लेकिन शीला सरकार में उद्योग मंत्री दीपचंद बंधु ने यह कहते हुए कि वह अंधविश्वासी नहीं हैं, इस बंगले में अपना ठिकाना बनाया।
दीपचंद बंधु ने नकारा अंधविश्वास और मिली मौत
बाद में दिल का दौरा पडऩे से बंधु की मृत्यु हो गई। दिल्ली और केंद्र सरकार के उच्चाधिकारी रहे शक्ति सिन्हा जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्ते में दामाद भी लगते थे, इस बंगले में रहने आ गए।
एक महिला अधिकारी के आरोप के बाद सिन्हा विवाद में फंसे। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़ी और विदेश चले गए। दिसंबर 2013 में जब अरविंद केजरीवाल पहली बार मुख्यमंत्री बने तो वह इस बंगले में न जाकर नई दिल्ली के तिलक लेन में उन्होंने अपना सरकारी आवास बनाया।
अब केजरीवाल दूसरी बार भारी बहुमत से मुख्यमंत्री बने हैं, लेकिन उनके लिए नया सरकारी घर नई दिल्ली इलाके में ही तलाशा जा रहा है और 33 शामनाथ मार्ग को दिल्ली सरकार केअतिथि गृह में बदल दिया गया है। हालाकि इसके लिए भी इसका बेहद कम उपयोग होता है।