आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल रविवार को बहस के लिए जंतर मंतर नहीं पहुंचे। आप से निकाले गए कार्यकर्ताओं ने केजरीवाल को स्वराज के मसले पर जंतर मंतर पर बहस करने की चुनौती दी थी।
रविवार को आप के पूर्व कार्यकर्ता करण सिंह ने नौ दिनों बाद अपना मौन व्रत तोड़ा। करण ने कहा कि वह आम आदमी वॉलेंटियर्स एक्शन मंच (आवाम) से जुड़े हैं। अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के दिखाए रास्ते पर चलना उनका मकसद है।
करण ने आरोप लगाया कि केजरीवाल बिना नींव के राजनीतिक महल खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी में जमीनी कार्यकर्ताओं को किनारे लगाया जा रहा है और ‘आप’ तानाशाही के रास्ते पर चल निकली है।
बता दें कि आवाम के बैनर तले 16 अगस्त से जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी था। इसी कड़ी में रविवार को अरविंद केजरीवाल को बहस के लिए बुलाया गया था। इस दौरान करीब दो सौ कार्यकर्ता 'आप' की टोपी पहनकर मौके पर पहुंचे थे।
पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन
आम आदमी सेना के बैनर तले रविवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि हुर्रियत नेताओं के खिलाफ केंद्र सरकार को सख्त कदम उठाना चाहिए। जरूरी है कि इन्हें जेल भेज दिया जाए। वहीं, भारत सरकार को पाकिस्तान की तरफ से हो रही गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। संसद की तरफ कूच करने की कोशिश में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का हिरासत में ले लिया।
यहां ललकार रहे हैं केजरीवाल
आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल का कहना है कि सरकार बनने पर वह इस बार इस्तीफा नहीं देंगे। दिल्ली में पूरी पांच साल तक सरकार चलाएंगे। केजरीवाल रविवार शाम दिल्ली के रोहिणी और किराड़ी में ललकार रैली को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भाजपा उनके ऊपर हमला करने की साजिश रच रही है।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली चुनाव में बहुमत न मिलने के बावजूद आम लोगों से पूछकर हमने सरकार बनाई। इसके लिए कांग्रेस ने समर्थन दिया। लेकिन कांग्रेस ने एक दिन भी काम करने नहीं दिया। फिर भी, किसी तरह 49 दिनों तक सरकार चलाई। आम लोगों के हित में फैसले लिए।
दिल्ली में महंगाई कम करने के साथ भ्रष्टाचार पर नकेल कसी। कांग्रेस के रोजाना की अड़चनों से तंग आकर इस्तीफा देना पड़ा। केजरीवाल के मुताबिक, हमने सोचा था कि इस्तीफे से विधानसभा भंग होगी। इसके बाद चुनाव होंगे और आप की बहुमत से सरकार बनेगी। हमें यह थोड़े पता था कि दोनों पार्टियां चुनाव ही नहीं कराएंगी।
केजरीवाल ने माना इस्तीफा देने के आम लोगों में गुस्सा था। लेकिन इससे सबक मिला है। पांच साल तक दिल्ली वालों के लिए काम करेंगे। केजरीवाल ने निजी चैनल के स्टिंग आपरेशन का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा उनके ऊपर हमला कराने की साजिश रच रही है। लेकिन वह डरने वाले नहीं हैं।
इतना ही नहीं, केजरीवाल का कहना था कि पिछली बार का हमला भी भाजपा ने करवाया था। दूसरी तरफ एम्स के सीवीओ के पद से हटाए गए संजीव चतुर्वेदी व दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा की ताकत कम करने का मुद्दा भी उठाया। इसके जरिये केंद्र सरकार की भ्रष्टाचार से लड़ने की मंशा पर सवालिया निशान लगाया।
सर्वे से बहुमत मिलने की दावा
केजरीवाल का कहना था कि भाजपा दिल्ली में सामने दिख रही हार से बुरी तरह डरी हुई है। पार्टी के सर्वे का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि पिछले दिनों कराए गए एक सर्वे से साफ है कि कांग्रेस का एक भी सीट नहीं मिलने वाली है।
जबकि भाजपा को भी सिर्फ 36 फीसदी वोट मिलेंगे। जबकि आप 46 फीसदी वोट के साथ बहुमत में रही। इस दौरान उन्होंने आरएसएस के एक सर्वे का भी जिक्र किया, जिसमें भाजपा को 32 सीटों से भी कम पर सिमटने की बात कही गई है।
ललकार रैली के संयोजक व वरिष्ठ नेता नवीन जयहिंद ने कहा कि अगर भाजपा एक बार फिर हमले की साजिश रचती है तो आप कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे। इस बार हाथ उठा तो उसे काट लिया जाएगा।
हम महात्मा गांधी के साथ भगत सिंह की भी संतानें हैं। हालांकि बाद केजरीवाल ने जयहिंद के बात से असहमति जताते हुए कहा कि हम अहिंसा के रास्ते पर चलेंगे। कोई कुछ भी करे, हमें हाथ नहीं उठाना है।