योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण पर बेशक आम आदमी पार्टी से बाहर होने की तलवार लटक रही है, लेकिन पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में पासा पलट भी सकता है। संभव है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को संयोजक पद छोड़ना पड़े। केजरीवाल के नजदीकी भी मान रहे हैं कि दोनों गुटों के बीच लड़ाई कांटे की है।
दरअसल, राष्ट्रीय परिषद आप की सबसे बड़ी इकाई है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) के बारे में फैसला और पार्टी के संविधान में संशोधन का अधिकार भी इसी के पास है। परिषद में फिलहाल 400 से ज्यादा सदस्य हैं। इसमें दिल्ली के सदस्यों की संख्या पचास से भी कम है। इसकी बैठक एक साल पहले हुई थी। दिल्ली के सदस्यों को छोड़कर टीम केजरीवाल का सीधा संपर्क इनसे ज्यादा नहीं रहा है।
फैसला खिलाफ जाने पर केजरीवाल की रणनीति
दूसरी तरफ योगेंद्र यादव आप के मिशन विस्तार से जुड़े हैं। केजरीवाल के नजदीकियों के मुताबिक, परिषद के सदस्यों के नियमित संपर्क में रहने से मुमकिन है कि इसमें यादव समर्थकों का पलड़ा भारी हो। 28 मार्र्च को परिषद की बैठक तय है। सूत्र बताते हैं कि फिलहाल दोनों गुट परिषद के सदस्यों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अभी तक तस्वीर साफ नहीं है। टीम केजरीवाल को आशंका इसलिए भी है क्योंकि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पीएसी से योगेंद्र-प्रशांत को निकालने का प्रस्ताव 11-8 के बेहद करीबी अंतर से पास हुआ था।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में साफ हो गया कि केजरीवाल अपनी बात मनवाने को किसी हद तक जा सकते हैं। टीम केजरीवाल के एक अहम सदस्य ने बताया कि अगर फैसला योगेंद्र-प्रशांत के हक में हुआ तो केजरीवाल पार्टी संयोजक का पद छोड़ देंगे। वहीं, विधायक दल में केजरीवाल का बहुमत होने से टकराव मुख्यमंत्री की सीट तक नहीं आएगा। उनका पूरा ध्यान दिल्ली में सरकार चलाने पर होगा। कोशिश अपने काम के जरिए विरोधियों को शांत कराने की होगी।
भूषण और योगेंद्र ने मांगा केजरीवाल से समय
आम आदमी पार्टी (आप) नेताओं में छिड़ी जंग के बीच सोमवार को वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण ने नरमी के संकेत दिए हैं। प्रशांत ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात का समय मांगा है। मुलाकात कर वह विवाद को सुलझाना चाहते हैं। हालांकि, टीम केजरीवाल ने इस पहल पर चुप्पी साध रखी है।
मीडिया को दिए गए बयान में भूषण ने कहा है कि उन्होंने अरविंद से समय मांगा है। वह अगर व्यक्तिगत तौर पर मिलने को तैयार होते हैं तो वह अकेले मिलेंगे। वहीं, अगर योगेंद्र यादव के साथ मुलाकात करने में आपत्ति नहीं होगी तो दोनों साथ बात करेंगे। मुलाकात के दौरान विवादों को सुलझाने की कोशिश होगी। भूषण ने उम्मीद जताई कि केजरीवाल का जवाब सकारात्मक होगा। यादव के करीबी सूत्रों ने बताया कि यह संदेश दोनों नेताओं (भूषण और योगेंद्र) की तरफ से सुबह मुख्यमंत्री को भिजवाया गया है।
दरअसल, वैचारिक मतभेदों से आप दो गुटों में बंट गई है। एक तरफ टीम केजरीवाल है तो दूसरी तरफ योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण का खेमा। विवाद इतना गहरा है कि पीएसी से बाहर करने के बाद पार्टी के 67 में से 60 विधायकों ने योगेंद्र व प्रशांत को पार्टी से निकालने के लिए अभियान चला रखा है। इसका फैसला 28 मार्च को आप की राष्ट्रीय परिषद की बैठक होना है। बावजूद इसके पार्टी के कुछ नेता दोनों पक्षों में सुलह-समझौते की कोशिश कर रहे हैं।