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जब जेठमलानी ने जेटली से पूछा-PM मोदी को जिरह में लाना चाहते हैं?

Tue, 16 May 2017 04:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाईकोर्ट ने कहा सवालों का मामले से कोई लेनादेना नहीं
 जेटली ने कहा जो काम किया खेलों के हित में किया    
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जेटली और जेठमलानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वित्त मंत्री अरुण जेटली मानहानि मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी घसीटने का प्रयास किया। उन्होंने कहा आप केबीनेट मंत्री है और उच्च चरित्र व प्रतिष्ठा का सबसे अच्छा न्यायाधीश प्रधानमंत्री ही हो सकते है।
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ऐसे में उनको बतौर गवाह बुलाना चाहिए। हाईकोर्ट ने हालांकि उनके तर्क को खारिज कर दिया। संयुक्त रजिस्ट्रार दीपाली शर्मा के समक्ष जिरह के दौरान केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमालानी ने कहा जब से आप मंत्रिमंडल के मंत्री हैं आपके लिए सबसे अच्छा चरित्र गवाह प्रधान मंत्री को स्वयं होना चाहिए। क्या उन्हें जिरह में लाना चाहते है।

संयुक्त रजिस्ट्रार ने इस सवाल को खारिज कर करते हुए कहा कि जेटली के गवाहों की सूची पहले ही रिकॉर्ड पर है। उन्होंने जेठमलानी के उस सवाल को भी खारिज कर दिया, क्या जेटली ने प्रधान मंत्री से परामर्श करने के बाद मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने कहा इस मामले में ऐसे सवाल उचित नहीं है।
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जिरह के दौरान जेटली ने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर फिरोजशाह कोटला स्टेडियम की पूरी लागत के लिए वित्त वर्ष 2003 में सरकार से कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था। जेटली ने केजरीवाल के अलावा आप के अन्य नेताओं के खिलाफ मानहानि मुकदमा किया है।

जेटली ने कहा कि चूंकि सरकार से स्टेडियम निर्माण का कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था इसलिए एसोसिएशन ने अपने संसाधनों के आधार पर स्टेडियम का निर्माण करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा धीरूभाई अंबानी की तरफ  से स्टेडियम के निर्माण में 22 करोड़ रुपये का मौखिक प्रस्ताव आया था।

जेठमलानी ने यह भी आरोप लगाया कि 57 करोड़ रुपए का दुरुपयोग किया गया लेकिन इस राशि को खर्च के रूप में दिखाया गया है। जेटली ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा राशि खेलों के बुनियादी ढांचे और संपत्ति के निर्माण पर खर्च किए गए थे। जेटली ने कहा व्यय की गई राशि व बनाई गई संपत्ति तथ्यात्मक साइट पर मौजूद हैं।
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