हाईकोर्ट ने अतिथि शिक्षकाें की नियमित नियुक्ति व पदोन्नति पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अक्तूबर की तारीख तय की गई है। कोर्ट ने अगली तारीख तक यथास्थिति कायम रखने के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में करीब 15,000 शिक्षकों को नियमित करने का फैसला लिया गया था। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि मानकों पर खरा उतरने वाले अतिथि शिक्षकों को सरकार नियमित करेगी।
अभी दिल्ली में करीब 17,000 अतिथि शिक्षक व सर्व शिक्षा अभियान के तहत नियुक्त शिक्षक हैं। इनमें से 15000 को नियमित करने के लिए बिल तैयार किया गया है। ये शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा पास हैं। सिसोदिया ने कहा कि 4 अक्तूबर को दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में सरकार बिल पेश करेगी।
4 अक्तूबर को विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा
दिल्ली उच्च न्यायालय
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सुनवाई के दौरान जस्टिस एके चावला के समक्ष दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता रमेश सिंह ने कहा कि अतिथि अध्यापकों को नियमित करने से संबंधित बिल को विधानसभा में पेश करने की तैयारी चल रही है।
इसे 4 अक्तूबर को विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। इस पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील से पूछा कि क्या इन अध्यापकों में वह अध्यापक भी होंगे जो वर्ष 2010 से काम कर रहे हैं।
इस पर सरकारी वकील ने जानकारी न होने की बात कही। इसके बाद कोर्ट ने नियुक्तियोें और पदोन्नति पर रोक लगाते हूए अगली तारीख तक यथा स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने 11 अक्तूबर तक यथा स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए
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मालूम हो कि हाईकोर्ट ने 2016 में याचिका पर सुनवाई के बाद राजधानी में अध्यापकों के 26 हजार से ज्याद पदों को भरने के निर्देश दिए थे। इस आदेश पर अब अमल होना शुरू हुआ है।
इनमें अध्यापकों के वह नौ हजार पद शामिल नहीं है जो बाद में खाली हुए हैं और जिनका विज्ञापन दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ( डीएसएसएसबी) ने सात अगस्त को निकाला था।
हालांकि इसे 24 अगस्त को वापस ले लिया गया। दिल्ली सरकार की ओर से इसके लिए कहा गया था कि सरकार पहले अतिथि अध्यापकों का मुद्दा सुलझाना चाहती है और उसके बाद नये अध्यापकों की भर्ती पर विचार किया जायेगा।
अलग-अलग सुर में बोल रहे हैं भाजपा नेता
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अतिथि शिक्षकों को दिल्ली सरकार द्वारा नियमित करने की घोषणा पर प्रदेश भाजपा के नेता अलग-अलग सुर में बोल रहे हैं। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का गेस्ट टीचर्स को नियमित करने का निर्णय हवा-हवाई है।
बिल को कैबिनेट की मंजूरी देने से पहले विभागीय, वित्तीय और विधि विभागों की अनिवार्य स्वीकृति नहीं ली गई। वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि यह निर्णय गेस्ट टीचरों के संघर्ष और उनको भाजपा के समर्थन की जीत है।
भाजपा वर्ष 2013 से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से आग्रह करती रही है कि वह उन्हें नियमित करने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित करें।