राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल की 59 छात्राओं को तहखाने में बंधक बनाने के मामले में मध्य जिले के हौजकाजी थाने की पुलिस ने बच्चियों को जबरन बंधक बनाने और जेजे एक्ट की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया है।
बुधवार को स्कूल पहुंची पुलिस ने स्कूल का डीवीआर (डिजीटल वीडियो रिकॉर्डर) कब्जे में लिया। जिन अभिभावकों ने बच्चों को बंधक बनाने की वीडियो रिकॉर्डिंग की थी, उनसे वह क्लिप भी ली।
कुछ अभिभावकों के बयान भी दर्ज किए। पुलिस ने स्कूल प्रशासन से मैनेजमेंट से जुड़े लोगों की लिस्ट भी मांगी है। मध्य जिला पुलिस उपायुक्त मनदीप सिंह रनधावा का कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी।
पुलिस की पूछताछ में स्कूल प्रशासन ने दावा किया कि जिस जगह बच्चियों को रखा गया था, वह तहखाना नहीं, एक्टिविटी रूम है। बच्चों को बंधक नहीं बनाया गया था, बल्कि एक्टिविटी रूम में भेज दिया गया था। वहां पंखे व बाकी सुविधाएं मौजूद थीं। पुलिस अधिकारियों ने स्कूल में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों का ब्योरा लिया। वहीं तहखानानुमा बेसमेंट के कथित एक्टिविटी रूम की भी पड़ताल की।
स्कूलों के क्लास रूम में कैमरा लगाने के प्रस्ताव पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली सरकार अपने स्कूलों की कक्षाओं में 1.4 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के प्रस्ताव की वजह बताए।
दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य कार्यवाहक न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि यह कदम बेशक स्कूलों में सुरक्षा कारणों के चलते सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हों, लेकिन इससे बच्चों पर दबाव बन सकता है।
पीठ ने यह गौर किया और हैरानी जताई कि इतने ज्यादा कैमरे कैसे क्लास रूम में लगाए जाएंगे, जबकि बच्चों को भी निजता का अधिकार है। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संजय घोष ने दलील दी कि क्लास रूम में कैमरे लगाकर विदेश की तर्ज पर बच्चों का माहौल देने की कोशिश की जा रही है। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि स्कूल में छात्राओं को कैद करने और 26 छात्राओं को फूड पॉयजनिंग की घटना ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के शिक्षा में सुधार के बड़े-बड़े दावों की हकीकत खोल दी है। उन्होंने दिल्ली सरकार के मंत्री इमरान हुसैन को भी कटघरे में खड़ा किया।
बुधवार को बल्लीमारान स्थित राबिया स्कूल का दौरा कर मनोज तिवारी ने प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों से मुलाकात की। मनोज तिवारी ने कहा कि राजधानी में यह बेहद दुखद घटना है।
फीस भरने में देरी के कारण बच्चियों को कैद करना बेहद शर्मनाक है। यह स्कूल केजरीवाल सरकार के मंत्री इमरान हुसैन के कार्यालय से कुछ ही दूरी पर है। यह संभव नहीं है कि यह घटना उनकी जानकारी में नहीं आई हो। इस मामले में उन्होंने इमरान हुसैन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।