ईडी ने आरोप लगाया था कि जांच के दौरान केजरीवाल को पांच अलग-अलग तारीखों पर समन भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने एजेंसी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया। इसी गैर-अनुपालन के आधार पर ईडी ने अदालत में शिकायत दर्ज की थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि समन का पालन न करना आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता, खासकर जब आरोपी ने अपनी अनुपस्थिति के वैध कारण बताए हों।
ईडी की शिकायतों के अनुसार, दिल्ली की अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच में केजरीवाल की भूमिका संदिग्ध थी। एजेंसी ने दावा किया कि नीति में अनियमितताओं से करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई, जिसमें आप नेता शामिल थे। हालांकि, केजरीवाल ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियां केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही हैं ताकि विपक्षी नेताओं को परेशान किया जा सके।
ईडी ने 21 मार्च 2024 को केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने भी एक अलग भ्रष्टाचार मामले में उन्हें हिरासत में लिया। केजरीवाल को कई हफ्तों तक तिहाड़ जेल में रहना पड़ा। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां सितंबर 2024 में उन्हें जमानत मिली।