दिल्ली में 25 दिसंबर 1928 को जन्मी विदुषी पद्म विभूषण कपिला वात्स्यायन का बुधवार सुबह 9 बजे गुलमोहर एन्क्लेव स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर है। वे 92 वर्ष की थीं और सालों से एकाकी जीवन व्यतीत कर रही थीं। वे कवि तथा आलोचक केशव मलिक की छोटी बहन थीं। अब उनके परिवार में उनके छोटे भाई सुभाष मलिक बचे हैं।
कपिला वात्स्यायन ने साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन में अपना पूरा जीवन लगा दिया। उन्हें 2011 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी शिक्षा-दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय, अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुई थी। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एमए किया था। मिशिगन विश्वविद्यालय से उन्होंने शिक्षा में स्नातकोत्तर किया था।
वे हिंदी के यशस्वी साहित्यकार दिवंगत सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की पत्नी थीं। उनका विवाह 1956 में हुआ था। वे 1969 से पति से अलग होकर एकाकी जीवन व्यतीत कर रही थीं। हालांकि उन्होंने पति का नाम हमेशा अपने नाम के साथ लगाकर रखा। वे प्रख्यात नर्तक शंभू महाराज और इतिहासकार वासुदेव शरण अग्रवाल की भी शिष्या रहीं।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की संस्थापक, संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी से फेलोशिप और अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित कपिला वात्स्यायन का पूरा जीवन लोगों के लिए आदर्श बना रहा। कुछ समय पहले तक वे इंडिया इंटरनेशनल के एशिया प्रोजेक्ट की अध्यक्ष भी थीं। उन्होंने विभिन्न कलाओं तथा उनके इतिहास पर करीब 20 किताबें लिखीं। इनमें द स्क्वायर एंड दि सर्कल ऑफ इंडियन आर्ट्स, भारत : द नाट्य शास्त्र, डांस इन इंडियन पेंटिंग, क्लासिकल इंडियन डांस इन लिटरेचर एंड आर्ट्स तथा ट्रांसमिशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन : लर्निंग थ्रू द आर्ट इन एशिया शामिल हैं।
वर्ष 2006 में उन्हें राज्यसभा सदस्य मनोनीत किया गया था, लेकिन लाभ के पद का विवाद शुरू हो जाने पर उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में उन्हें फिर से इस पद के लिए मनोनीत किया गया। प्रख्यात संस्कृति कर्मी अशोक बाजपेई ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वे महान विदुषी और विलक्षण प्रतिभा की महिला थीं।
लोदी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के मौजूदा सचिव और आजीवन ट्रस्टी कंवल अली ने कपिला वात्स्यायन के निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के कारण सीमित लोगों की मौजूदगी में ही दोपहर 2 बजे लोदी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
हस्तियों ने कहा...
उनके निधन पर आईआईसी के अध्यक्ष एनएन वोहरा ने बयान जारी कर कहा कि वात्स्यायन ने संस्थान के विकास में अमूल्य योगदान दिया। उनके निधन से आया खालीपन भरा नहीं जा सकता। उन्हें केंद्र तथा दुनियाभर के लोग हमेशा याद रखेंगे।
हिंदी के मशहूर लेखक अशोक वाजपेयी ने फेसबुक पर लिखा कि वात्स्यायन की मृत्यु व्यक्तिगत क्षति है। मुझे उनके जाने का बेहद दुख है। वे महान बुद्धिजीवी, तीक्ष्ण बुद्धि, रचनात्मक प्रतिभा तथा संस्थान निर्माता थीं। भारतीय साहित्य जगत ने एक अगुवा, अथक प्रोत्साहक व कलाओं, विचारों तथा कल्पना के बीच पुल को खो दिया है। उनका जाना मेरी तरह कई लोगों के लिए निजी क्षति है।
उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करण सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि देश ने उच्च शिक्षित तथा पांडित्य वाली महिला को खो दिया है। गीत गोविंद तथा थंजावुर के मंदिरों पर उनके लेखन की तरह ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की स्थापना और उसके पांडुलिपि विभाग की स्थापना उनके द्वारा किए गए बड़े काम हैं।