माना जा रहा था कि वे अपने अलावा कलावती के नामांकन पर आप से नाराज चल रहे विधायक कर्नल देवेन्द्र सिंह, पंकज पुष्कर, संदीप कुमार, जितेन्द्र तोमर, आसिम अहमद के हस्ताक्षर करवा सकते है।
इसके अलावा आजकल उनकी भाजपा नेताओं से भी घनिष्ठता बनी हुई है और संभवत: भाजपा के चार में से कुछ विधायकों के हस्ताक्षर करवा ले। शाम होते-होते उनके अभियान की हवा निकल गई। भाजपा ने आप की अंदरूनी कलह से स्वयं को दूर रखना ही उचित समझा।
भाजपा नेता नहीं चाहते थे कि नामांकन पर समर्थन देकर केजरीवाल के खिलाफ चल रही हवा को अपनी तरफ मोड़ा जाए। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं एवं विधायकों ने बताया कि कपिल मिश्रा ने हालांकि उनसे संपर्क नहीं किया लेकिन यदि वे करते भी तो हम किसी भी हालत में कलावती के नामांकन का समर्थन करने वाले नहीं थे।
उधर नामांकन के लिए तय सदस्यों की संख्या पूरी न होते देख आप के नाराज विधायकों ने भी इस विवाद से दूर रहने में ही भलाई समझी। यानि कुल मिलाकर कपिल मिश्रा का अभियान एक ड्रामा बन कर ही रह गया।