दिल्ली विधानसभा द्वारा अयोग्य करार दिए गए आप के बागी नेता कपिल मिश्रा ने इस फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने ये आदेश दिया कि कपिल, विधानसभा अध्यक्ष के आदेश में उनके खिलाफ दिए गए निष्कर्षों पर अपना जवाब दाखिल करें।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने कहा कि, मिश्रा ने कहा था कि अगर वह स्पीकर राम निवास गोयल के दो अगस्त के आदेश में दिए गए निष्कर्षों को चुनौती नहीं देते तो प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का उनके दावे का कोई मतलब नहीं होगा।
इस पर कपिल के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि उनके खिलाफ लगाए सभी आरोप विवादास्पद नहीं हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी में अपनी सदस्यता छोड़ दी है।
अदालत ने उन्हें हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जिसमें वह दो अगस्त के आदेश पर जवाब देंगे। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 4 सितंबर की तारीख तय की।