फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिहाई के बाद कन्हैया ने किया संघ और मोदी पर सीधा हमला

विज्ञापन
विज्ञापन
तिहाड़ से रिहाई के बाद जेएनयू पहुंचे कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री समेत मीडिया और अपने विरोधियों पर तीखा हमला बोला। कन्हैया ने कहा कि टीवी के जिन लोगों ने रोहित वेमुला की लड़ाई में साथ दिया है उन्हें धन्यवाद कहना चाहता हूं।
विज्ञापन


कन्हैया ने अपने विरोध में खबर चलाने वाली टीवी मीडिया और बीजेपी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग सही गलत का फैसला करने में शरीक हुए उनका धन्यवाद। दिल्ली पुलिस का धन्यवाद जिन्होंने इतना बड़ा काम किया।

कन्हैया ने एक कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि बदनाम हुए तो क्या नाम नहीं हुआ.....? जेएनयू को बदनाम करने के लिए चैनलों के प्राइम टाइम पर जेएनयू को जगह देने वाले लोगों का भी धन्यवाद। इसी बहाने सही, उन्होने कम से कम जेएनयू को प्राइम टाइम पर जगह तो दी।
विज्ञापन

शिकार उसका किया जाता है जो शिकार करने लायक हो

कन्हैया ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पर भी तंज कसा। कहा कि एबीवीपी के लिए भी धन्यवाद। जो लोग अपने आपको राजनीतिक विद्वान समझते हैं उनकी हालत देख लीजिए। किसी के लिए कोई दुर्भावना हमारे मन में नहीं है। खासकर एबीवीपी के लिए। हम लोग संवैधानिक लोग हैं।

एबीवीपी पर टिप्पणी करते हुए कन्हैया ने कहा कि शिकार उसका किया जाता है जो शिकार करने लायक हो। सच में कह रहा हूं जेएनयू ने जो दिखाया जेएनयू जो सच कहने के लिए खड़ा हुआ है वो बड़ा काम है। कन्हैया बोला कि इन सबलोगों ने सारा काम प्लान की तरह किया, और जो हमने किया वो अचानक।

हमें इस देश की न्यायप्रक्रिया पर भरोसा है। हम बदलाव के पक्ष में है। जो संविधान की प्रस्तावना में लिखा है हम उसके साथ। मैं भाषण नहीं दूंगा मैं सिर्फ अपना अनुभव आपको बताउंगा। मैं पहले पढ़ता ज्यादा था सिस्टम को झेलता कम था। इस बार सिस्टम को झेला ज्यादा है।

सत्यमेव जयते ट्वीट का किया जिक्र

जेएनयू में लोग रिसर्च करते हैं। जो प्रक्रिया न्यायालय में है उस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा। मैं उस देश की जनता से कहना चाहता हूं, जो सब जानती है। प्रधानमंत्री जी ने ट्वीट किया है कि सत्यमेव जयते।

प्रधानमंत्री जी से मेरा वैचारिक मतभेद है। मैं ये कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जी सत्यमेव जयते क्योंकि ये सत्यमेव जयते आपका नहीं है। हमारे संविधान के द्वारा हमें दिया गया है।

कन्हैया ने कहा कि छात्रों के प्रति देशद्रोह का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में किया जाता है। हमारे यहां रेलवे स्टेशन पर एक जादूगर आता है वो कहता है जादूगर दिखाएगा जादू। नितिनिर्माता कहते हैं काला धन आएगा। हर-हर मोदी घर-घर मोदी। सबका साथ सबका विकास जैसे जुमले हम सारे लोगों के जेहन में हैं, ये महज जुमले हैं।

सरकार चाहती है कि जुमले भुला दिए जाएं

कन्हैया ने अपने भाषण में आगे कहा कि सरकार चाहती है कि उनके द्वारा बोले गए जुमलों को भुला दिया जाए। इसके लिए एक तरीका अपनाया गया है। वो पहले इस देश की तमाम रिसर्च के फेलोशिप बंद करते हैं। सोचते हैं कि लोग फैलोशिप मांगने लगेंगे तो जितनी फैलोशिप उन्हें पहले मिलती थी उतनी उन्हें फिर वापस कर दीजिए इस तरह से सरकार जुमले भुला देना चाहती है।

आज माननीय, जेएनयू का मुद्दा इस वजह से प्राइमटाइम पर चला रहे हैं, कि लोग असल मुद्दा भूल जाएं। मैने पुलिसवालों से पूछा तो उन्होंने कहा कि पुलिस महकमें में सब जातिवाद से आते हैं।

कन्हैया ने कहा कि हम उसी भ्रष्टाचार, जातिवाद और भुखमरी से आजादी चाहते हैं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि बाबा साहब ने कहा कि राजनीतिक लोकतंत्र से काम नहीं चलेगा। हम सामाजिक लोकतंत्र लेकर आएंगे।

जबतक तक जेल में चना रहेगा आना-जाना लगा रहेगा..

हम इसलिए लड़ रहे हैं कि एक राष्ट्रपति का बेटा और एक चपरासी का बेटा एक ही स्कूल में पढ़ाई कर सकें। सरकार जिस आंदोलन को दबाना चाहती थी वही आंदोलन इतना बड़ा बनकर उभरा है। हम जेएनयू के लोग सभ्य सादगी से बात करते हैं।

मुझे जेल में दो रंग की कटोरी मिलीं। एक कटोरी का कलर लाल था एक का नीला। मैं कटोरी को देखकर सोच रहा था कि इस देश में कुछ अच्छा होने वाला है।

मुझे वो प्लेट देश की तरह लग रही थी। उसमें नीले रंग की कटोरी अंबेडकर के आंदोलन की तरह थी। हम सबका साथ सबका विकास वाला देश बनाएंगे। एक कहावत है कि जबतक तक जेल में चना रहेगा। आना-जाना लगा रहेगा।
विज्ञापन

मोदी जी मन की बात करते हैं सुनते नहीं हैं

आज माननीय प्रधानमंत्री जी का आदर ये बोलना पड़ेगा नहीं तो देशद्रोह का आरोप लगाया जाएगा। मेरी इच्छा हुई की टीवी में घुस जाउं और मोदी जी का सूट पकड़कर उनसे पूछूं मोदी जी छोड़ दीजिए स्टॉलिन की बात कभी हिटलर की भी बात कीजिए। आप उसकी बात कीजिए जिसकी आप टोपी लगाते हैं। गोलवलकर जी की बात कीजिए। मोदी जी मन की बात करते हैं सुनते नहीं हैं।

तीन महीने बाद मेरी मां से बात हुई । जब जेएनयू में था तो मां से बात नहीं करता था। जेल में गया तो पता चला घर पर बात करते रहनी चाहिए। आप लोग भी करते रहा करिए। मैने तीन महीने बाद मां को फोन किया है उनसे कहा तुमने मोदी जी पर अच्छी चुटकी ली।

मां ने कहा कि चुटकी तो वो लोग लेते हैं हम तो अपना दर्द बोलते हैं। मैने तो अपना दर्द कहा। वो बोलीं कि मोदी जी भी किसी मां के बेटे हैं। वो मन की बात करते हैं मेरे बेटे की भी बात कर लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें