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Delhi NCR News: बांसुरी की तान से गूंजा कमानी, मंच बना कुरुक्षेत्र

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नई दिल्ली। हे अर्जुन, मैं माया के अधीन नहीं, माया मेरे अधीन है, श्रीमद्भागवतगीता में उच्चारित यह वाक्य बृहस्पतिवार की शाम कमानी ऑडिटोरियम में जीवंत हो रहे थे। वहीं, जब बांसुरी की पहली तान गूंजी, तो लगा समय ठहर गया है। मंच पर बालकृष्ण की लीला से लेकर कुरुक्षेत्र के महायुद्ध तक के प्रसंग ऐसे साकार हुए कि लगा मानो दर्शक स्वयं उस युग में पहुंच गए हों। हॉल में बैठे सैकड़ों दर्शकों की आंखें और मन एक साथ ठहर से गए।
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बाल-कृष्ण की नटखट मुस्कान से लेकर महाभारत के रणक्षेत्र में अर्जुन को दिया गया गीता-उपदेश, हर दृश्य ऐसा लगा मानो पुराणों के पन्ने खुलकर हमारे सामने जीवंत हो गए हों। श्रीराम भारतीय कला केंद्र का प्रतिष्ठित नृत्य-नाटक कृष्ण इन दिनों अपने 49वें संस्करण के साथ मंडी हाउस के कमानी ऑडिटोरियम में मंचित हो रहा है। बुधवार को इसके दूसरे दिन दर्शकों ने श्रीकृष्ण के जन्म, रासलीला, मथुरा-वृंदावन की कथाओं और कुरुक्षेत्र के महायुद्ध तक की संपूर्ण यात्रा को अपनी आंखों के सामने घटित होते महसूस किया। निर्देशक एवं केंद्र की अध्यक्ष पद्मश्री शोभा दीपक सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, साहस और ज्ञान का अद्वितीय संगम है। हमारी कोशिश यही है कि दर्शक इसे सिर्फ देखें नहीं, बल्कि महसूस करें, जी लें। शशिधरन नायर की रचनात्मक कोरियोग्राफी, पारंपरिक वेशभूषा, शास्त्रीय और लोक नृत्य का अद्भुत संगम, और युवा कलाकारों की संपूर्ण ऊर्जा, सब मिलकर मंच को वृंदावन की गलियों, मथुरा के उत्सव और कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में बदल देते हैं। यह सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि समय के पार की एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो देखने वालों के हृदय में लंबे समय तक गूंजती रहती है।
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