उप-ठेकेदार को मिली थी दुर्घटना की सूचना
जांच के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब कमल ध्यानी रात में घर लौट रहे थे। वे लगभग 15 फुट गहरे गड्ढे में गिर गए, जो डीजेबी की सीवर पाइपलाइन परियोजना के कारण खोदा गया था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि उप-ठेकेदार राजेश प्रजापति को दुर्घटना की सूचना कई घंटे पहले मिल गई थी, लेकिन उसने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
चश्मदीद परिवार ने बताया कैसे हुआ हादसा
पुलिस ने बताया कि उसी रात इलाके से गुजर रहे एक परिवार ने देखा कि कमल संभवतः गड्ढे में गिर गए हैं। उन्होंने तत्काल घटनास्थल पर मौजूद सुरक्षा गार्ड और पास के तंबू में रहने वाले एक व्यक्ति को इसकी सूचना दी। सुरक्षा गार्ड ने उप-ठेकेदार प्रजापति द्वारा नियुक्त कनिष्ठ कर्मचारी को घटना से अवगत कराया। इसके बाद, रात करीब 12 बजकर 22 मिनट पर कनिष्ठ कर्मचारी ने प्रजापति को फोन कर मौके पर आने को कहा। अधिकारियों के अनुसार, प्रजापति बाद में घटनास्थल पर पहुंचा, उसने गड्ढे में मोटरसाइकिल और व्यक्ति को देखा, लेकिन किसी को सूचित किए बिना वापस चला गया।
ठेकेदार और डीजेबी अधिकारियों पर एक्शन
इस घटना के संबंध में ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) के तहत जनकपुरी थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। दिल्ली सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, मृतक कमल ध्यानी के परिवार ने दिल्ली जल बोर्ड पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है और इस मामले में साजिश की भी आशंका जताई है। पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
कमल की मौत के लिए कौन जिम्मेदार
यह घटना सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। खोदे गए गड्ढों को उचित सुरक्षा उपायों के साथ ढकना या चेतावनी संकेत लगाना आवश्यक है, ताकि ऐसी दुखद दुर्घटनाएं रोकी जा सकें। दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित ठेकेदारों की यह जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। जनता के जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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