कालका-काहलों ने तीन एफआईआर में कार्रवाई का दिया हवाला, जीके बोले-सैकड़ों आरोपों के बावजूद गिरफ्तार नहीं करा पाए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लेकर कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों के आरोपों के बाद सिख राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। कालका-काहलों ने तीन एफआईआर में अदालती कार्रवाई का हवाला देते हुए जीके पर गुरु की गोलक के धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए, वहीं जीके ने इसे अपनी आवाज दबाने की राजनीतिक कोशिश करार देते हुए अदालत से बरी होने का भरोसा जताया।
कालका और काहलों ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पूर्व महासचिव गुरमीत सिंह शंटी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर संख्या 192/2020 में प्रिंटिंग प्रेस के लिए विदेश से दशवंध के रूप में भेजे गए करीब एक लाख कनाडाई डॉलर के कथित दुरुपयोग का आरोप है। उन्होंने पुस्तकों की छपाई और पानी के कथित फर्जी बिलों के जरिये गुरु की गोलक की राशि के दुरुपयोग का भी उल्लेख किया। वहीं, काहलों की शिकायत पर दर्ज एफआईआर संख्या 181/2022 में जीटीबीआईटी कॉलेज के नाम पर कमेटी से कथित तौर पर 10 लाख रुपये अनियमित तरीके से निकालने का आरोप लगाया गया है।
इन आरोपों पर पलटवार करते हुए जीके ने कहा कि 2019 से 2026 तक उनके खिलाफ सैकड़ों आरोप लगाए गए, लेकिन सरकार और पुलिस होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं कराया जा सका। उन्होंने कालका की प्रेस कॉन्फ्रेंस को अपने खिलाफ 100वीं प्रेस कॉन्फ्रेंस बताते हुए कहा कि उनका डीएनए जत्थेदार संतोख सिंह का है और उन्हें कौम के लिए बोलने से नहीं रोका जा सकता।
जीके ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ मामले आवाज दबाने के लिए दर्ज कराए गए हैं। उन्होंने गुरुद्वारों की जमीन बेचने की कोशिशों का विरोध करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि उन्हें अदालत पर भरोसा है और वह बरी होकर लौटेंगे।