अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को पूर्व आप विधायक नरेश बलियान की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह याचिका महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज मामले में जमानत की मांग को लेकर दायर की गई थी। अब इस मामले की सुनवाई 23 अप्रैल को किसी अन्य पीठ के समक्ष होगी। नरेश बलियान को 4 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर गैंगस्टर कपिल सांगवान के नेतृत्व वाले आपराधिक सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप है। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को ट्रायल कोर्ट की जज कावेरी बावेजा ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जो आरोपी और संगठित अपराध सिंडिकेट के बीच संबंध दर्शाते हैं। साथ ही मकोका के सख्त प्रावधानों के तहत जमानत की शर्तें पूरी नहीं होतीं।
गौरतलब है कि बलियान को एक अन्य जबरन वसूली मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्हें मकोका मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले 13 मार्च को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दिल्ली पुलिस की जांच में देरी पर नाराजगी जताई थी और पूछा था कि चार्जशीट कब दाखिल की जाएगी। अदालत ने यह भी नोट किया था कि दो गवाह अपने बयानों से मुकर चुके हैं। अब मामले की सुनवाई नई बेंच में होगी।