सेक्टर-128 में बृहस्पतिवार को जेपी इंफ्राटेक के स्टेक होल्डर्स की एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) हुई। इसमें करीब 70 स्टेक होल्डर्स शामिल हुए। उन्होंने जेपी पर अभी भी विश्वास करने की बात कही।
वहीं, जेपी बिल्डर की ओर से तीन साल में बचे हुए 17,756 फ्लैटों का निर्माण कार्य पूरा कराने की कार्ययोजना बताई गई। बिल्डर ने दिवालिया प्रक्रिया के दौरान 4949 फ्लैट दिलाने की बात भी कही। हालांकि, मामला एनसीएलटी में है।
निर्माण कार्य पूरे कराने के लिए एनबीसीसी और जेपी के बीच मामला फंसा हुआ है। बैठक में जेपी इंफ्राटेक के आईआरपी अनुज जैन भी उपस्थित रहे।
बैठक में जेपी इंफ्राटेक के चेयरमैन व एमडी मनोज गौड़ ने कहा कि अभी जेपी इंफ्राटेक का निदेशक मंडल निलंबित है और आईआरपी के अधीन हम काम कर रहे हैं, लेकिन हमने भरोसा नहीं छोड़ा है और अब भी हम खरीदारों के अलावा कंपनी के कर्मचारियों के साथ हैं। बैठक में स्टेक होल्डर्स को कंपनी की वास्तविक स्थिति के बारे में बताया गया।
साथ ही, स्टेक होल्डर्स भरोसा दिलाया गया कि अगर हमें इजाजत मिले तो बचे हुए 17,756 फ्लैट बनाकर दे सकते हैं। गौड़ ने बैठक में इसकी कार्ययोजना पर भी चर्चा की। इस बाबत कंपनी के सीएफओ प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि स्टेक होल्डर्स ने कंपनी पर भरोसा जताया है। अभी तक 12736 फ्लैट का काम पूरा किया गया है।
इसके अलावा 5925 फ्लैट का निर्माण कार्य हाल ही में पूरा कराया गया है। इसमें 4949 फ्लैट की रजिस्ट्री कराई भी कराई गई है। इसके अलावा 500 फ्लैटों की ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) के लिए आवेदन किया गया है।
काम पूरे करने के लिए 7 हजार करोड़ चाहिए
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि जेपी इंफ्राटेक को काम पूरे करने के लिए 7 हजार करोड़ रुपये चाहिए। इसमें घर खरीदारों पर अभी 3300 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके अलावा प्रमोटर्स से 400 करोड़ रुपये मिलने की बात हुई है।
इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे के टोल से हमें आय प्राप्त होती है उससे मदद मिल जाएगी। आखिर में 1300 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, जिसे किसी तरह से जुटाकर काम पूरा किया जा सकता है।