जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ चुनाव में लेफ्ट समर्थित छात्र संगठनों की यूनिटी ने सभी चार केंद्रीय पैनल सीटों पर शानदार जीत दर्ज की, जबकि पिछले साल एक सीट जीतने वाली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी इस बार चारों सीटों पर चुनाव हार गई। कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई भी मुख्य मुकाबले में नहीं टिक पाई और बुरी तरह पिछड़ गई। लगभग 67 फीसदी मतदान के साथ संपन्न इस चुनाव में लेफ्ट की यह साफ-सुथरी जीत कैंपस में वैचारिक एकजुटता और छात्र मुद्दों पर मजबूत पकड़ को दर्शाती है। मतगणना के दौरान ही लेफ्ट के समर्थकों में गजब का उत्साह देखा जा रहा था।
चार सीटों पर लेफ्ट की जीत
1. अदिति मिश्रा, अध्यक्ष, लेफ्ट
2. किझाकूट गोपिका बाबू, उपाध्यक्ष
3. सुनील यादव, महासचिव
4. दानिश अली, संयुक्त सचिव
जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों का प्रोफाइल
अदिति मिश्रा, अध्यक्ष
अदिति मिश्रा उत्तर प्रदेश के बनारस की रहने वाली है। वर्ष 2017 में उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। वर्तमान में वह स्कूल ऑफ इंटरेशनल स्टडीज में पीएचडी कर रही है। उनका शोध का विषय लैंगिक हिंसा है। पीएचडी के दूसरे वर्ष में वह आंतरिक शिकायत समिति में छात्र प्रतिनिधि के रूप में चयनित हुई थी। वर्ष 2019 में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ उन्होंने विरोध दर्ज कराया था। साथ ही नागरिकता संशोधन कानून विरोधी प्रदर्शनों में भी शामिल हुई।
किझाकूट गोपिका बाबू, उपाध्यक्ष
किझाकूट गोपिका बाबू जेएनयू में विधि एवं शासन अध्ययन केंद्र में पीएचडी की छात्रा है। वह केरल के त्रिशुर की रहने वाली है। वर्तमान में एसएफआई जेएनयू इकाई की सचिवालय सदस्य हैं। गोपिका ने जेएनयू में वर्ष 2022 में दाखिला लिया था। जबकि डीयू के मिरांडा हाउस से स्नातक की पढ़ाई की है। वर्ष 2023-24 में जेएनयू छात्र संघ चुनाव की मांग को हुए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। जेएनयू छात्र संघ में काउंसलर का पद भी संभाल चुकी है। एमए की छात्रा के रूप में अपनी छात्रवृत्ति समाप्त होने और दिल्ली में रहने के लिए नौकरी करने के बाद भी गोपिका ने काउंसलर के तौर पर अपना काम जारी रखा।
सुनील यादव, महासचिव
सुनील यादव उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रहने वाले है। जेएनयू में सेंटर फॉर यूरोपियन स्टडीज में पीएचडी के शोधार्थी है। सुनील अपने परिवार के पहले सदस्य है जिन्होंनेन स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। सुनील के पिता सरकारी विद्यालय में ग्रुप डी श्रेणी के कर्मचारी है। जबकि मां गृहिणी है। सुनील ने डीयू से वर्ष 2021 में स्नातक किया है। उसके बाद जेएनयू में एमए कोर्स में दाखिला लिया। वर्ष 2022 में वह स्टूडेंट फैकल्टी कोऑर्डिनेटर के तौर पर चुने गए। परिसर में ऑफलाइन कक्षाओं की बहाली की मांग को लेकर चले आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। 2025 में वह स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में काउंसलर चुने गए। साथ ही वर्ष 2025 में छात्र संघ की प्रवेश परीक्षा बहाली सहित कई दूसरे मुद्दों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में भी हिस्सा लिया।
दानिश अली, संयुक्त सचिव
दानिश अली स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में सीएचएस में पीएचडी की प्रथम वर्ष की छात्रा है। वह मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से आती है। उनकी स्कूली शिक्षा पास के कस्बे में हुई। स्कूल के दिनों में वह राज्य स्तर की थ्रोबॉल और क्रिकेट खिलाड़ी रही हैं। उनके पिता सेवानिवृत्त सरकारी स्कूल शिक्षक हैं। जबकि उनकी माता एक अन्य सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल हैं। दानिश ने इतिहास विषय में स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के एसजीटीबी खालसा कॉलेज से की। नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भी विरोध दर्ज कराया। इसके बाद उन्होंने 2022-2024 बैच में सीएचएस से एमए कोर्स में दाखिला लिया।