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जेएनयू कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार को नहीं मिला विस्तार, नए वीसी की तलाश शुरू

Tue, 27 Oct 2020 01:46 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जेएनयू वीसी प्रो. एम जगदीश कुमार - फोटो : अमर उजाला
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में कुलपति पद की तलाश शुरू हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कुलपति पद के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। प्रो. एम जगदीश कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। मंत्रालय ने प्रो. कुमार के कार्यकाल को विस्तार न देने का फैसला लिया है। कुलपति पद के आवेदक के लिए विश्वविद्यालय में प्रोफेसर  के रूप में दस वर्ष तक पढ़ाने और अकादमिक संगठन में शैक्षणिक व  प्रशासनिक नेतृत्व के प्रमाण समेत दस वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। 

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 24 अक्तूबर को जेएनयू कुलपति पद के विज्ञापन को मंजूरी दी है। यह नियुक्ति जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय अधिनियम 1966के प्रावधानों के अंतर्गत गठित एक समिति द्वारा सिफारिश किए गए नामों के एक पैनल में से की जाएगी। 

इच्छुक आवेदक 24 नवंबर तक शिक्षा मंत्रालय और जेएनयू रजिस्ट्रार को ऑनलाइन आवेदन पत्र भेज सकता है।इसके अलावा आवेदन के साथ विजिलेंस जांच का सर्टिफिकेट देना भी अनिवार्य होगा। जेएनयू कुलपति पद के आवेदन को नए नियमों के तहत मंजूरी दी है। इसमें किसी भी पद के खाली होने के तीन से छह महीने पहले विज्ञापन के आधार पर चयन समिति और चयन का काम करना होगा। आवेदनकर्ता की उम्र 65 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए। इस पद के लिए प्रतिमाह 2,10,000 रुपये और11,250 रुपये का विशेष भत्ता व अन्य सामान्य भत्तें भी मिलेंगे। 
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विवादों केबीच जेएनयू को आगे बढ़ाने पर रखा फोकस
वर्तमान कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार का पांच साल का कार्यकाल हमेशा विवादों में रहा। हालांकि कुलपति प्रो. कुमार ने अपने ढंग से विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने पर फोकस रखा। इसके के चलते एनआईआरएफ रैंकिंग में लगातार चौथी बार ऑल इंडिया वर्ग में दूसरा तो विश्वविद्यालय में पहला स्थान बनाए रखा है। शोध के चलते ही विश्वविद्यालय की रैंकिंग में लगतार सुधार हुआ है।

पहला विवाद कार्यकाल संभालने के 11वें दिन ही कैंपस में आतंकी अफजल गुरु की शहादत दिवस मनाने और देशविरोधी नारे से हुआ। इस घटना के बाद वामपंथी छात्र और शिक्षक संगठनों केसाथ लगातार विवाद चलते रहे। 2019 में कैंपस हड़ताल, हॉस्टल में बाहरी लोगों द्वारा मारपीट आदि की घटना के चलते लगातार पांच महीने तक पढ़ाई प्रभावित रही। 

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