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जेएनयू में छात्रों का बवाल, कुलपति की पत्नी को बनाया बंधक

Tue, 26 Mar 2019 12:14 AM IST
sapna singla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जेएनयू - फोटो : social media
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जेएनयू कैंपस में एक हफ्ते से चल रही भूख हड़ताल व विरोध प्रदर्शन सोमवार देर शाम उग्र हो गया। छात्रों ने कुलपति के घर का घेराव करते हुए ताले, खिड़कियों के शीशे तोड़ डाले और सुरक्षाकर्मियों से मारपीट की। इस दौरान बंधक बनाकर कुलपति की पत्नी के साथ बदसलूकी भी की गई तथा उन्हें कहीं बात करने नहीं दिया गया। अन्य सुरक्षा कर्मियों ने कुलपति की पत्नी को निवास से निकाला।

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हालांकि इस दौरान वे घायल हो गई हैं। इससे पहले भी जेएनयू छात्रसंघ समेत अन्य छात्र कुलपति के साथ मारपीट और धक्कामुक्की कर चुके हैं। जेएनयू छात्रसंघ और वामपंथी संगठनों से जुड़े छात्रों ने सोमवार देर शाम कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार के निवास का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों के घेराव के दौरान कुलपति तो घर पर नहीं थे लेकिन उनकी पत्नी छात्रों के हमले के चलते घायल हो गई हैं।



जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में इस साल से कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा से दाखिला शुरू होने के विरोध में सोमवार को छात्रसंघ के आह्वान पर छात्र व शिक्षक सामूहिक भूख हड़ताल में शामिल हुए। आठ दिन से भूख हड़ताल में शामिल छात्रसंघ की पूर्व पदाधिकारी व हरियाणा निवासी गीता कुमारी बेहोश हो गई।

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गीता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रबंधन ने छात्रसंघ के आरोपों को नकारते हुए कहा कि कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा का फैसला शैक्षिक और कार्यकारिणी परिषद में हुआ था। प्रवेश परीक्षा में बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे, जिससे छात्रों को कोई परेशानी नहीं होगी।

जेएनयू में विश्वविद्यालय प्रबंधन और छात्रसंघ आमने-सामने आ गया है। छात्रसंघ की कॉल पर आठ दिन से 11 छात्र नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे थे।

हालांकि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा कोई सुनवाई न होने पर छात्रसंघ ने सोमवार को देशभर के विश्वविद्यालयों के छात्रों से सामूहिक भूख हड़ताल में शामिल होने का आग्रह किया था।

इसी के चलते विभिन्न कैंपस में वामपंथी संगठनों से जुड़े शिक्षक व छात्र सामूहिक भूख हड़ताल में शामिल हुए। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हड़ताल में शामिल छात्रों से भूख हड़ताल खत्म करने की मांग रखी है। विश्वविद्यालय का तर्क है कि सुविधा को देखते हुए छात्र कंप्यूटर प्रवेश परीक्षा पर आपत्ति न करें। 
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