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JNUSU Poll Results: ABVP का दावा, स्कूल काउंसलर के 42 में से 23 जीते, चुनाव समिति ने नहीं की कोई घोषणा

Sun, 27 Apr 2025 08:28 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एबीवीपी जेएनयू इकाई के अध्यक्ष राजेश्वर कांत दुबे ने कहा कि स्कूल काउंसिल के 42 में से 23 सीटों पर जीत प्राप्त कर एबीवीपी ने काउंसिल में 50 फीसदी से अधिक की उपस्थिति का इतिहास रच दिया है। 
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JNU - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ चुनाव का अंतिम परिणाम सोमवार को जारी किया जाएगा। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 16 स्कूलों काउंसलर के 42 में से 23 पदों पर परिषद के उम्मीदवारों की जीत का दावा किया। हालांकि चुनाव समिति की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई।

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सेंट्रल पैनल के लिए रविवार शाम तक करीब तीन हजार से ज्यादा वोटों की गिनती में एबीवीपी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर आगे थी। इस बार छात्र संघ चुनाव को लेकर 70 फीसदी मतदान हुआ था। पिछले वर्ष की तुलना में तीन फीसदी की कमी देखने को मिली। मतदान के लिए 7906 पंजीकृत मतदाता थे। इसमें 43 फीसदी महिला और 57 फीसदी पुरुष मतदाता थे। 25 अप्रैल को छात्र संघ को लेकर मतदान हुआ था।

एबीवीपी ने रचा इतिहास
एबीवीपी जेएनयू इकाई के अध्यक्ष राजेश्वर कांत दुबे ने कहा कि स्कूल काउंसिल के 42 में से 23 सीटों पर जीत प्राप्त कर एबीवीपी ने काउंसिल में 50 फीसदी से अधिक की उपस्थिति का इतिहास रच दिया है। इससे जेएनयू छात्र संघ द्वारा लिए जाने वाले फैसलों में अब परिषद को अहम जगह मिलेगी जो वामपंथ के गढ़ में बड़ी सेंध की तरह काम करेगा। यह किसी भी अन्य छात्र संगठन की तुलना में सर्वाधिक है। विभिन्न स्कूलों के काउंसलर पदों पर परिषद के उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत भी दर्ज की है। पिछले बार एबीवीपी के 17 काउंसलर जीते थे।

संघर्ष का है यह परिणाम
यह जीत एबीवीपी के रूप में उस सकारात्मक बदलाव की विजय है जिसे जेएनयू के छात्रों ने चुना है। राष्ट्रवाद, अकादमिक उत्कृष्टता और छात्र हितों के लिए हमारे संघर्ष का यह परिणाम है। हम भविष्य में भी परिसर को राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला बनाने और छात्र कल्याण के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करते रहेंगे। इस बदलाव की लहर के लिए परिषद जेएनयू के सभी जागरूक छात्रों को आभार ज्ञापित करता है।

25 साल बाद स्कूल ऑफ सोशल साइंस में मिली जीत
उन्होंने कहा कि स्कूल ऑफ सोशल साइंस जिसे जेएनयू में वामपंथ का गढ़ माना जाता रहा है। वहां एबीवीपी ने 25 वर्षों बाद दो सीटों पर विजय प्राप्त कर एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत दिया है। इसी तरह स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में भी दो सीटों पर विजय हासिल कर नई राजनीतिक धारा को स्थापित किया है। जेएनयू छात्र संघ चुनाव के सेंट्रल पैनल की चारों सीटों पर एबीवीपी को मजबूत बढ़त मिल रही है। हालांकि अभी गिनती जारी है।

चार पदों के लिए 29 उम्मीदवार है मैदान में
सेंट्रल पैनल में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद के लिए 29 उम्मीदवार मैदान में है। इसमें अध्यक्ष पद के लिए 13, उपाध्यक्ष के लिए पांच, सचिव के लिए छह और संयुक्त सचिव के लिए पांच उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे है। वहीं 16 स्कूलों के 42 काउंसलर पदों के लिए 120 उम्मीदवार मैदान में है। सेंट्रल पैनल के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(एबीवीपी) ने अध्यक्ष पद के लिए शिखा स्वराज, उपाध्यक्ष पद के लिए निट्टू गौतम, सचिव पद के लिए कुणाल राय एवं संयुक्त सचिव पद के लिए वैभव मीणा को मैदान में उतारा था। जबकि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने अध्यक्ष पद के लिए प्रदीप ढाका, उपाध्यक्ष के लिए मोहम्मद कैफ, सचिव के लिए अरुण प्रताप और संयुक्त सचिव के लिए सलोनी खंडेलवाल चुनाव लड़ रहे थे।

आईसा और डीएसएफ के यह है उम्मीदवार
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) ने संयुक्त तौर पर छात्र संघ चुनाव लड़ा। इसमें अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार पीएचडी, उपाध्यक्ष पद के लिए मनीषा, सचिव पद के लिए मुंतहा फातिमा और संयुक्त सचिव के लिए नरेश को उम्मीदवार बनाया गया था।

वामदल में फूट से बना नया गठबंधन
पिछली बार आइसा, डीएसएफ, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन(एआईएसएफ) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया(एसएफआई) ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन इस बार बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन(बापसा), एआईएसएफ, एसएफआई और प्रोगेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (पीएसए) ने सेंट्रल पैनल के लिए संयुक्त उम्मीदवार घोषित किए। इसमें अध्यक्ष पद के लिए चौधरी तैय्यबा अहमद, उपाध्यक्ष पद के लिए संतोष कुमार, सचिव के लिए रामनिवास गुर्जर और संयुक्त सचिव के लिए निगम कुमारी ने चुनाव लड़ा।
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झंडा जलाने को लेकर हुई गरमागर्मी
उधर, आइसा ने मतगणना के दौरान एबीवीपी पर फिलिस्तीन का झंडा जलाने का आरोप लगाया। इसको लेकर दोनों संगठनों के समर्थकों के बीच गरमागर्मी बढ़ गई। आइसा के अनुसार झंडा जलाने की एबीवीपी के सदस्यों की घृणित हरकतों की कड़ी निंदा करते है। ऐसा व्यवहार न केवल नैतिक रूप से घृणित है बल्कि घृणा और हिंसा को बढ़ावा देने वाला भी है। एबीवीपी ने जानबूझकर राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान किया। हमारी प्रशासन से मांग है कि इस संबंध में तत्काल कार्रवाई की जाएं।
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