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जेएनयू छात्र निलंबन मामला: 'अपीलीय कमेटी ने पहले ही कर रखा था निलंबन का फैसला'

Thu, 05 Jan 2017 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
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जेएनयू छात्र निलंबन मामले में छात्र उमर खालिद ने अपीलीय अथारिटी पर बदनियती से निर्णय लेने का आरोप लगाया है। उमर ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि अथारिटी ने पहले ही निलंबन के फैसले को बहाल रखने का निर्णय ले रखा था, यही कारण है कि उसे पक्ष रखने के लिए न तो उचित समय प्रदान किया गया न ही आरोप संबंधी दस्तावेज प्रदान किए गए।
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हाईकोर्ट ने अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराए गए छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बान भट्टïाचार्य सहित सभी 16 छात्रों के खिलाफ अगले आदेश तक कार्रवाई न करने पर रोक लगा रखी है।

सभी छात्रों ने 9 फरवरी के विवादास्पद मामले में अपीलीय अथारिटी के निर्णय को चुनौती दी गई है। संबंधित अथारिटी ने जेएनयू प्रशासन के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित 19 को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराते हुए उनकेनिलंबन की सजा को बहाल रखा है।
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न्यायमूर्ति वीके राव के समक्ष खालिद के अधिवक्ता ने अपीली अथारिटी के फैसले को आधारहीन बताया। उन्होंने तर्क रखा कि अपीलीय अथारिटी द्वारा 22 अगस्त को दिया आदेश एक तरफ है। उन्होंने कहा कि जेएनयू के कुलपति की अपील अथारिटी ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था लेकिन जो मुद्दे उनके मुवक्किलों ने उठाए उन पर विचार ही नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय एकतरफ है। 9 फरवरी को जेएनयू परिसर में देश विरोधी नारेबाजी को लेकर इस छात्रों पर आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा जिस मेल पर प्रशासन नोटिस भेजने का तर्क रख रहा है वह उनकेमुवक्क्लि का है ही नहीं।

उनके मुवक्क्लि को यह भी नहीं बताया गया कि उस पर क्या आरोप है। आरोप संबंधी गवाहों के बयान, दस्तावेज विडियों इत्यादि की प्रतियां तक नहीं दी गई। आखिर इसके अभाव में उनका मुवक्किल कैसे अपना पक्ष रख सकता है। हम बार-बार दस्तावेज मांगते रहे लेकिन उसे प्रदान नहीं किया गया।

उन्होंने कमेटी के एक सदस्य के पत्र का हवाला देते हुए कहा इससे स्पष्ट है कि अथारिटी ने निलंबन के आदेश को बहाल रखने का निर्णय पहले ही कर रखा था। जांच में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। यह सरासर प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है।
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