जय भीम, यूजीसी एक्ट लागू करो के लगे नारे
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जय भीम, रोहित एक्ट लागू करो, वीसी मुर्दाबाद, जातिवादी वीसी को बर्खास्त करो और यूजीसी एक्ट लागू करो जैसे नारे लगाए। छात्रसंघ अध्यक्ष का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, लेकिन बिना वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें घसीटकर हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शन कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के कथित जातिवाचक बयान को लेकर किया जाना था। छात्र इस मुद्दे पर कार्रवाई और अपनी मांगों को शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचाने के लिए मार्च करना चाहते थे। पुलिस का कहना है कि हालात ने बिगड़े इसलिए जब छात्रों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया तब उन्हें हिरासत में लिया गया। कैंपस में अभी भी पुलिस बल तैनात हैं।
10 दिन पहले जेएनयू छात्रसंघ ने कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित पर एक पॉडकास्ट में कथित रूप से जातिसूचक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया और इसकी कड़ी निंदा की। इस पॉडकास्ट में यूजीसी नियमों पर चर्चा हो रही थी। हालांकि, कुलपति ने इन आरोपों से इनकार किया।
छात्रसंघ कर रहा इस्तीफे की मांग
छात्रसंघ के अनुसार, बीती 16 फरवरी को जारी 52 मिनट के एक पॉडकास्ट में कुलपति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों, छात्रसंघ पदाधिकारियों के निष्कासन और विश्वविद्यालय की छवि जैसे मुद्दों पर बातचीत की थी। छात्रसंघ का कहना था कि इस दौरान दिए गए कुछ बयान आपत्तिजनक थे। संघ ने बयान जारी कर कुलपति से इस्तीफे की मांग की और कहा कि ऐसे वक्तव्यों से विश्वविद्यालय की गरिमा प्रभावित होती है।
छात्रसंघ ने विशेष रूप से उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि स्थायी रूप से पीड़ित बने रहने या पीड़ित होने का दावा करने से प्रगति नहीं हो सकती। संघ का आरोप है कि यह टिप्पणी विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर सामाजिक अन्याय और बहिष्कार की वास्तविकताओं को नजरअंदाज करती है।
क्या है कुलपति का पक्ष?
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कुलपति ने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी विशेष समुदाय के खिलाफ कुछ नहीं कहा। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं पिछड़े वर्ग की पृष्ठभूमि से आती हैं।