नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), नागरिकता रजिस्टर पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्रसंघ अध्यक्ष आइषी घोष और अन्य छात्रों ने सोमवार को जंतर-मंतर पर विरोध जताया। साथ ही छात्रों ने शरजील और डॉ. कफील खान की रिहाई को लेकर नारे लगाए।
प्रदर्शन के दौरान आइशी घोष ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक सरकारी अस्पताल में बच्चे ऑक्सीजन की कमी की वजह से मर रहे थे, तब एक डॉक्टर ने खुद के दम पर सरकारी अस्पताल को ऑक्सीजन मुहैया करवाई। ऐसे डॉक्टर कफील अहमद खान के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर, उन्हें जेल में डाल दिया गया है। साथ ही फर्जी वीडियो के आधार पर शरजील इमाम को जेल में बंद किया गया है।
जेएनयू अध्यक्ष ने डॉक्टर कफील अहमद खान और शरजील इमाम की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि जेएनयू के छात्र होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि वह देश में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ खड़े हों। उन्होंने कहा कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ जेएनयू के छात्रों की आवाज सरकार तक पहुंचे, इसीलिए यहां इकट्ठे हुए हैं।
बता दें कि फिलहाल राजद्रोह मामले में तिहाड़ में बंद शरजील इमाम के खिलाफ अलीगढ़ कोर्ट ने प्रोडक्शन वारंट जारी किया है, अब 18 फरवरी को शरजील इमाम को अलीगढ़ जिला न्यायालय में पेश किया जाएगा। वहीं राजद्रोह के ही मामले में डॉक्टर कफील अहमद खान मथुरा जेल में बंद हैं। राजद्रोह कानून के तहत लगभग एक साल तक उनके जेल से बाहर आने की संभावना नजर नहीं आ रही है। डॉक्टर कफील अहमद खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर देशविरोधी भड़काऊ भाषण दिया था।