जेएनयू के मुस्लिम छात्रों ने तबलीगी जमात को अपना समर्थन दिया है। इसके अलावा तबलीगी जमात के पदाधिकारियों पर मामला दर्ज करने का विरोध करते हुए उसे रद्द करने की मांग भी रखी है |
जेएनयू के एमएसएफ छात्र संगठन ने तबलीगी जमात के समर्थन में मुस्लिम स्टूडेंट को डिजिटल पोस्टर शेयर किया है। एबीवीपी की राष्ट्रीय महासचिव व जेएनयू की छात्रा निधि त्रिपाठी ने बताया कि एमएसएफ छात्र संगठन ने 2019 छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई को अपना समर्थन दिया था। अब इस मामले में राहुल गांधी को अपना पक्ष रखना चाहिए। क्योंकि यह उनकी विचारधारा के लोग है।
बता दें कि अंडमान निकोबार का पहला कोरोना संक्रमित दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी मरकज से गया था। अंडमान निकोबार पुलिस से सूचना मिलने के बाद यह खुलासा हुआ था कि मरकज में 1500 से ज्यादा लोग हैं और इनमें काफी कोरोना से संक्रमित हैं।
यहां के लोगों के बीमार होने की बात छिपाई गई थी। दिल्ली पुलिस को इसके पुख्ता सबूत मिले हैं कि मरकज में आए लोग यहां से यूपी, गुजरात, तेलांगाना व तमिलनाडु जमात के लिए गए थे। दिल्ली के जाकिर नगर व पुल प्रह्लादपुर भी लोग गए थे।
इससे दक्षिण दिल्ली में हड़कंप मचा है। गृह मंत्रालय के आदेश के बाद यह जानकारी जुटाई जा रही है कि जमात में आए लोग देश में कहा-कहां गए। विदेशियों के आने की वजह से मरकज में कोरोना फैला था।
दक्षिण-पूर्व जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंडमान निकोबार का पहला कोरोना संक्रमित 21 व 22 मार्च या उससे पहले मरकज में ठहरा था। वह दिल्ली समेत देश में आठ जगहों पर ठहरा था। इसके बाद दिल्ली पुलिस अलर्ट हुई थी।
निजामुद्दीन थाना पुलिस ने मरकज के आयोजकों को बुलाया था और सामाजिक दूरी बनाने के लिए कहा था। पुलिस के पास इस बैठक की वीडियो है। इसके बाद दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशासन, डीएम व एसडीएम को जानकारी दी थी। पुलिस का कहना है कि एसडीएम ने शुरू में फोन नहीं उठाया था। 25 मार्च को यहां डब्ल्यूएचओ की टीम आई थी और क्वारंटीन करने की बात कहकर चली गई थी।