दिल्ली की एक अदालत ने जेएनयू के छात्र नजीब अहमद के लापता होने के मामले में जांच बंद करने की रिपोर्ट संबंधी सभी बयान और दस्तावेजों की प्रतियां दो हफ्ते के भीतर नजीब की मां को मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नवीन कुमार कश्यप ने जांच एजेंसी को भौतिक या इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में इन्हें मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। मामले में जांच करने वाले अधिकारियों को सात मई को निजी तौर पर पेश होने के लिए कहा है।
मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ अहमद की मां फातिमा नफीस की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत का यह आदेश आया। अहमद की मां की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उन्हें गवाहों के बयान मुहैया नहीं कराए गए।
ये है पूरा मामला
गौरतलब है कि जेएनयू में कथित देश विरोधी नारेबाजी की घटना नौ फरवरी 2016 को हुई थी और इसके आठ महीने बाद पीएचडी का छात्र नजीब अहमद 15 अक्तूबर 2016 को गायब हो गया था। उसके गायब होने के पीछे एबीवीपी के नौ छात्रों का हाथ होने का आरोप लगा था।
नजीब की मां फातिमा नफीस व अन्य का आरोप था कि नजीब का एबीवीपी से जुड़े नौ छात्रों से झगड़ा हुआ था। इस मामले की जांच पहले दिल्ली पुलिस ने की थी। फातिमा नफीस ने याचिका दायर कर नजीब केस की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने सीबीआई को मई 2017 में जांच सौंपी थी। सीबीआई भी करीब दो साल की जांच के बाद भी नजीब को तलाश करने में नाकाम रही थी। हाईकोर्ट की अनुमति के बाद सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।