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जेएनयू देशद्रोह केसः 23 जुलाई तक अनुमति पर फैसला ले सरकार

Tue, 09 Apr 2019 10:01 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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अदालत ने जेएनयू नारेबाजी विवाद में देशद्रोह के आरोप का मुकदमा चलाने पर निर्णय के लिए दिल्ली सरकार को तीन माह की मोहलत दी है। दिल्ली पुलिस ने सरकारी अनुमति के बिना ही जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार उमर खालिद, अनिर्बन भट्टाचार्य और अन्य के खिलाफ देशद्रोह की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। इससे पूर्व, दिल्ली सरकार से अनुमति न मिलने पर अदालत ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पेशल सेल के डीसीपी को तलब किया था।

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पटियाला हाउस अदालत के सीएमएम दीपक सेहरावत ने इस मामले की सुनवाई अब 23 जुलाई 2019 को तय की है। दिल्ली सरकार के वकील ने पांच अप्रैल को कोर्ट में कहा था दिल्ली पुलिस ने जेएनयू नारेबाजी विवाद में बिना अनिवार्य अनुमति के जल्दबाजी और गुपचुप तरीके से आरोप पत्र दाखिल किया है।

इस अनुमति पर निर्णय में एक माह लगेगा। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब तीन साल की जांच के बाद 10 आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह व अन्य धाराओं में मुकदमा चलाने के लिए 14 जनवरी 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया था।
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देशद्रोह का केस बिना सरकारी अनुमति के नहीं चलाया जा सकता। मामला संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर जेएनयू कैंपस में नौ फरवरी 2016 की रात आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है।

इस मामले में कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य को गिरफ्तार गया था और वे फिलहाल जमानत पर हैं। आरोप पत्र में सात कश्मीरी छात्रों मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, आकिब हुसैन, रईस, बशारत, उमर गुल, खालिद बशीर भी नामजद हैं। इन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था।

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