हॉस्टल फीस बढ़ाए जाने के विरोध में कैंपस से लेकर सड़क तक प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल करने वाले जेएनयू प्रशासन को उनके अकादमिक ब्योरे की कोई जानकारी नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इस तथ्य पर हैरानी जताई।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन की ओर से छात्रों की जानकारी के संबंध में दी गई दलील पर हैरानी जताई है। पीठ ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने के बाद प्रशासन यह कह रहा है कि उनके पास छात्रों का अकादमिक ब्योरा नहीं है। अदालत मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को करेगी।
न्यायमूर्ति एके चावला ने जेएनयू प्रशासन से हलफनामा दायर करने के लिए कहा है। कोर्ट ने इस हलफनामे में उन छात्रों के पाठ्यक्रम, उसकी स्थिति और परिसर में रहने की अवधि की जानकारी देने के लिए कहा है, जिनके खिलाफ प्रशासन की ओर से अवमानना की याचिका दायर की गई है। याचिका में जेएनयू ने कहा है कि छात्रों ने प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन किया।
जेएनयू की ओर से केंद्र सरकार की स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा पेश हुई। उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों और पुलिस के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
प्रशासनिक ब्लॉक के पास प्रदर्शन का आरोप
जेएनयू ने अपनी याचिका में दावा किया कि छात्रों ने प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन नहीं करने संबंधी 9 अगस्त, 2017 के अदालती आदेश का पूरी तरह उल्लंघन किया। पुलिस ने भी जेएनयू में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से मना करते हुए आदेश का उल्लंघन किया है।
100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन पर लगी है रोक
इससे पहले भी छात्रों ने एक बार प्रशासनिक ब्लॉक को घेरकर प्रदर्शन किया था। तब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसी के बाद अदालत ने किसी छात्र या किसी भी समूह के द्वारा प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे के भीतर प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी।