निष्कासित छात्र संघ पदाधिकारियों ने प्रशासन पर स्वास्थ्य जांच न कराने का लगाया आरोप
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जेएनयू में छात्र संघ पदाधिकारियों समेत 17 छात्रों की तीन अक्तूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी है। निष्कासित पदाधिकारियों ने प्रशासन पर स्वास्थ्य जांच न कराने का आरोप लगाया है।
छात्र संघ सीपीओ मैनुअल रद्द करने, पदाधिकारियों का निष्कासन वापस लेने, परिसर की जर्जर आधारभूत संरचना में सुधार, जीकैश बहाल करने और आईक्यूएसी के माध्यम से भर्ती में कथित गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। रोहित एक्ट के अनुरूप ईओसी में सुधार की मांग भी की गई है।
छात्र संघ ने कुलगुरु पर एक अधिकारी को भेजकर अनशनरत छात्रों को धमकाने का आरोप लगाया है। छात्र संघ के अनुसार, अधिकारी ने निष्कासन और परिसर में प्रवेश पर रोक के आदेश का हवाला देते हुए भूख हड़ताल को अवैध बताया और चेतावनी दी कि आंदोलन जारी रखने पर निष्कासन की अवधि बढ़ाई जा सकती है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल है। हालांकि वीडियो की अमर उजाला पुष्टि नहीं करता है।
वीडियो में अधिकारी छात्रों को बता रहा है कि कुलगुरु का स्वास्थ्य ठीक नहीं हैं, उन्हें एक-दो दिन में अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है, इस कारण वह नहीं मिल सकतीं। मगर छात्रों की मांगों पर विचार किया जा रहा है। अस्पताल से वापस आने के बाद मुलाकात की संभावना है, इसमें दो हफ्ते भी लग सकते हैं। साथ ही निष्कासित और कैंपस से बाहर किए गए छात्र अनशन पर नहीं बैठ सकते। केवल जेएनयू के वैध छात्रों का मेडिकल किया जाएगा। निष्कासित छात्रों का भूख हड़ताल पर बैठना उनके खिलाफ जा सकता है, यह बेल के नियमों की अवहेलना है।
छात्र संघ पदाधिकारियों ने कहा कि दबाव और डराने की कोशिशों के बावजूद भूख हड़ताल मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी। संघ ने आंदोलन में और अधिक छात्रों को शामिल करने की बात कही है।