सात साल पुराने जिगिषा घोष हत्या मामले में आज दिल्ली की अदालत ने दो दोषियों को मौत की सजा व एक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानकर दोषियों को यह सजा सुनाई है।
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गौरतलब है कि अभियोजन पक्ष ने भी दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की है। अधिकतम सजा की मांग करते हुए अभियोजन ने कहा था कि दोषियों ने केवल मौज मस्ती के लिए 28 साल की युवती की हत्या कर दी। ऐसे अपराधियों के साथ नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद दोषियों को सजा सुनाने के लिए 22 अगस्त की तारीख तय की थी और आज कार्रवाई शुरु करते हुए अदालत ने रवि कपूर और अमित शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई वहीं बलजीत मलिक के लिए उम्रकैद की सजा मुकर्रर की है।
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14 जुलाई को दोषी करार दिया था
जिगिषा घोष हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
अदालत ने तीन आरोपियों को 14 जुलाई को हत्या, अपहरण, लूट, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य नष्ट करने व आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में दोषी करार दिया था। एचपी कंप्यूटर में ऑपरेशन मैनेजर जिगिषा घोष (28) की मार्च 2009 में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी।
अदालत ने रवि कपूर, अमित शुक्ला व बलजीत मलिक को हत्या, अपहरण, हथियार के बल पर लूट, फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश व साक्ष्य नष्ट करने संबंधी धाराओं में दोषी ठहराया था। कोर्ट ने रवि कपूर को आर्म्स एक्ट के तहत भी दोषी ठहराया था।
दिल्ली पुलिस के विशेष अधिवक्ता राजीव मोहन ने दोषियों के लिए अधिकतम सजा के रूप में मृत्युदंड की मांग की। उन्होंने कहा कि इन दोषियों ने केवल अपनी मौज मस्ती के लिए एक युवती को अगवा कर उससे लूटपाट की और अपनी पहचान छिपाने के लिए उसकी हत्या कर दी।
दोषियों को नहीं कोई पछतावा
jigisha ghose murder
इसके बाद दोषियों ने पीड़िता के एटीएम से पैसे निकाले। उसकी हत्या के बाद हत्यारों उस पैसे से खरीदारी की। अपराध को अंजाम देने के बाद उनके चेहरे पर पछतावे का कोई निशान नहीं था।
अभियोजन ने कहा कि इन दोषियों पर महिला पत्रकार व एक टैक्सी ड्राइवर की हत्या के मामले भी विचाराधीन हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ मकोका के तहत भी मामला दर्ज किया है। इनके सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं है। इनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा व अमित कुमार ने अभियोजन की दलील पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि कोई मौज मस्ती के लिए किसी की हत्या नहीं करता। मौज मस्ती के लिए अगवा किया और पहचान छिपाने के डर से हत्या कर दी। यह दोनों दलीलें विरोधाभासी हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोषियों को सजा सुनाने के लिए 22 अगस्त की तारीख तय की थी।
20 अगस्त 2016: दोषियों की सजा पर बहस, अभियोजन ने दोषियों के लिये मांगी फांसी, बचाव पक्ष ने किया नरमी बरतने का आग्रह, सजा पर फैसला सुरक्षित।
14 जुलाई 2016: कोर्ट ने तीन आरोपियों को हत्या, अपहरण, लूटपाट समेत कई धाराओं में ठहराया दोषी।
5 जुलाई 2016 : कोर्ट ने अंतिम जिरह सुनने के बाद फैसला रखा सुरक्षित।
15 अप्रैल 2010 : मुकदमे की सुनवाई हुई शुरू, जिगिषा के पिता बने अभियोजन के पहले गवाह।
5 दिसंबर 2009: कोर्ट ने तीन आरोपियों के खिलाफ तय किए आरोप।
30 अगस्त 2009: कोर्ट ने आरोपों पर बहस सुनने के लिए 28 अगस्त की तारीख की तय।
जून 2009: पुलिस ने जांच के बाद जिगिषा घोष मामले में चार्जशीट की दाखिल।
25 मार्च: पुलिस ने दोषियों को किया गिरफ्तार, पत्रकार सौम्या विश्वनाथन मर्डर केस भी सुलझाया, उसे 30 सितंबर 2008 की रात कार से घर लौटते समय दोषियों ने मार दी थी गोली।
19 मार्च: सूरजकुंड इलाके में मिला जिगिसा का शव।
18 मार्च 2009: जिगिषा घोष को कैब ने सुबह चार बजे घर के नजदीक छोड़ा, दोषियों ने किया अगवा।