एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित करने से पहले प्रथम चरण के गांवों को शहरी क्षेत्र में घोषित करने का विरोध हो रहा है। शहरी क्षेत्र घोषित होने से किसानों को सर्किल रेट को दोगुना मुआवजा ही मिल पा रहा है। इस बीच यह तथ्य सामने आया है, कि 15 दिसंबर 2015 को तत्कालीन अखिलेश सरकार ने दयानतपुर व रन्हेरा गांव को यमुना प्राधिकरण के अधिसूचित शहरी एरिया में शामिल कर दिया था। तब से ये गांव शहरी क्षेत्र में ही घोषित हैं।
सूत्रों ने बताया कि उस समय कुल 80 गांवों के नामों की सूची जारी की गई थी, जबकि इन दोनों गांवों की जमीन प्रस्तावित हवाई पट्टी के सबसे करीब है। बता दें, कि हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शहरी क्षेत्र घोषित कर दोगुना मुआवजा देने के मसले पर ट्वीट कर सवाल उठाते हुए कहा है कि ‘जेवर एयरपोर्ट के नाम पर सरकार किसानों-ग्रामीणों को कानूनी कागजी बातों का झांसा देकर उनकी जमीन एक तो बिना उनकी मर्जी के और भी औने-पौने दाम पर हड़प लेना चाहती है। इससे किसान-गरीबों का विरोध इतना बढ़ेगा कि अगले चुनाव में अमीरों की हितैषी भाजपा खुद अपनी ही जमीन खो बैठेगी।’