जाट आरक्षण आंदोलन ने प्रदेश के दो प्रमुख औद्योगिक नगरों गुडग़ांव और फरीदाबाद की आर्थिक कमर तोड़कर रख दी है। सबसे ज्यादा नुकसान गुडग़ांव को उठाना पड़ा है।
यहां पर धनकोट रेलवे स्टेशन को जला दिया गया। कंपोनेट न आ पाने की वजह से देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी को कारों का उत्पादन रोकना पड़ा।
खौफ की वजह से तीन दिन तक जनता घरों में कैद रही। दूसरी ओर फरीदाबाद में हाईवे जाम और रेलवे ट्रैक रोकने की वजह से वेंडर कंपनियां कंपोनेंट मदर यूनिटों को नहीं पहुंचा पाईं। यहां आंदोलनकारियों पर पुलिस को लाठी चार्ज के लिए विवश होना पड़ा। अमर उजाला ने शहर में हुए नुकसान का जायजा लिया। पेश है संवाददाता ओम प्रकाश की रिपोर्ट।
धनकोट रेलवे हाल्ट का हाल-
जब हम दिल्ली-जयपुर रेलवे रूट स्थित धनकोट हाल्ट पहुंचते हैं तो यहां आरक्षण की आग के निशान देखने को मिलते हैं। इसका रिकॉर्ड रूम जलकर खाक हो गया है। रिकार्ड जलने के बाद बची हुई कालिख बता रही है कि यहां कितना बड़ा उपद्रव हुआ।
लेकिन प्रशासन की नजर में यह बहुत छोटी घटना है। जिला प्रशासन की धारा-144 से बेपरवाह जाट आंदोलनकारी जगह-जगह इकट्ठा होकर जाम लगाए रखा। कई जगहों पर कारों और ऑटो के शीशे तोड़ दिए। इन सबके बावजूद पुलिस मूक दर्शक रही।
गुलजार रहने वाली सड़कों पर सन्नाटा
उद्योग विहार सेक्टर-18 में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति का प्लांट है। यहां दिन भर वाहनों आवाजाही रहती है। ट्रॉलों पर लोगों के सपनों की गाडिय़ां लदती हैं, लेकिन इन दिनों स्थिति सामान्य नहीं है।
जब से जाट आंदोलन शुरू हुआ है तब से यहां की रौनक गायब है। इन कारों में लगने वाले कंपोनेंट नहीं आ पा रहे हैं। शनिवार से अब तक करीब 10 हजार मारुति कारें नहीं बन पाई हैं, इससे अरबों का नुकसान हो चुका है।
2600 से अधिक औद्योगिक यूनिटों वाले औद्योगिक क्षेत्र उद्योग विहार के फेज-4 में काफी शांति का वातावरण दिखा। वहां काम करने वाले कर्मचारियों ने बातचीत के दौरान बताया कि आरक्षण आंदोलन के कारण गारमेंट, ऑटोमोबाइल और लाइट इंजीनियरिंग यूनिटों को मैनपावर की समस्या परेशान कर रही है।
उद्योग विहार फेज-4 की गारमेंट यूनिटों में कर्मचारियों की उपस्थिति 20 से 25 फीसदी के ही बीच रही। इससे औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो रहा है। गुडग़ांव में करीब करीब पांच हजार करोड़ और फरीदाबाद में 500 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।