जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन में भाग लेने वालों की कहानियां भी आंदोलन का हिस्सा बन गई हैं। कोई परिवार की चिंता छोड़कर यहां डटा है तो कोई नौकरी के बीच समय निकालकर तो कोई नौकरी छोड़कर जिम्मेदारी निभा रहा है। दिन हो या रात, प्रदर्शन स्थल पर लोगों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है। देशभर के साथ अमेरिका व कनाडा से भी भोजन के ऑर्डर आ रहे हैं। यही वजह है कि जनपथ मेट्रो स्टेशन से प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने के रास्ते में बड़ी संख्या में फूड डिलीवरी कर्मी दिख रहे हैं। हालांकि, जरूरत से ज्यादा भोजन पहुंचने के कारण खाना बर्बाद भी हो रहा है। अधिकांश खाना भेजने वालों ने अपनी पहचान गुप्त रखी है।
सीजेपी के प्रदर्शन में देशभर से छात्र जुट रहे हैं। गर्मी, बारिश और कठिन परिस्थितियों के बीच ये युवा जंतर-मंतर पर डटे हैं। मध्यप्रदेश के 17 वर्षीय यश कोटा में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया, माता-पिता को लगता है कि मैं कोटा में पढ़ रहा हूं। दोस्तों से कहा कि भाई से मिलने दिल्ली आया हूं। चेन्नई की 16 वर्षीय मीनाक्षी ने दादा-दादी को कहा कि वह दोस्त के जन्मदिन में जा रही है, लेकिन यहां आ गई। ऐसे ही कई छात्र-छात्राएं हैं, जो फुटपाथ में सोकर आंदोलन को मजबूत कर रहे हैं। यूपी के 21 वर्षीय सचिन पांडेय आंदोलन शुरू होने के बाद से यहीं हैं।
कुछ को परिवार की चिंता थी, कुछ को पढ़ाई प्रभावित होने का डर, लेकिन वे अधिकारों व भविष्य के लिए आवाज उठाना जरूरी मानते हैं। कई छात्र अस्थायी टेंट में रहकर दिन-रात प्रदर्शन कर रहे हैं। स्वयंसेवक सिंद्धात ने बताया कि दो दिनों में करीब 2000 से अधिक ऑर्डर आ चुके हैं। इनमें पिज्जा, बर्गर, समोसे, थाली, बिरयानी शामिल हैं। कई ऑर्डर कुछ हजार से 20 हजार रुपये तक के बताए जा रहे हैं। यहां कई लोगों ने स्टॉल लगाया हुआ है। इनमें से ललिता ने आधे दिन की कमाई से पानी की बोतलें बांटीं, मयूर विहार के हर्षित ने समोसे बांटे। फैजल ने कहा, खाना पहुंचाकर चैन मिलता है। जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्राएं बोलीं, दिन हो या रात, यहां घर जैसा सुरक्षित महसूस होता है
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राएं भी भागीदारी निभा रही हैं। इन छात्राओं का कहना है कि यहां उन्हें सहयोग, अपनापन और सुरक्षित माहौल मिल रहा है। फॉरेंसिक साइंस की छात्रा फातिमा पिछले 22 दिनों से जंतर-मंतर पर रह रही हैं। सभी लोग मिल-जुलकर रह रहे हैं, एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं और रात में भी उन्हें किसी तरह की असुरक्षा महसूस नहीं होती।
फातिमा के मुताबिक, अगर माहौल सुरक्षित नहीं होता तो इतनी बड़ी संख्या में लड़कियां यहां मौजूद नहीं होतीं। प्रदर्शन स्थल पर डीयू की कुछ छात्राएं वॉलंटियर के रूप में काम करती नजर आईं। मिरांडा हाउस और कमला नेहरू कॉलेज की छात्राएं खाने-पीने के बाद बचने वाले कचरे को इकट्ठा करने और व्यवस्था बनाए रखने में मदद कर रही हैं। राजेंद्र नगर की रहने वाली राशि मिश्रा ने बताया कि उन्हें यहां का माहौल काफी अलग और सकारात्मक लगा। कलाकार स्वाति अपनी कला के जरिये भी अपनी भावनाएं जाहिर कर रही हैं।