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दिल्ली विस में लोकपाल बिल पेश, योगेन्द्र-प्रशांत ने किया विरोध

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दिल्ली विधानसभा में आज भारी हंगामे और विवादों के बीच जनलोकपाल विधेयक 2015 पेश किया जा रहा है। सरकार की ओर से उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे पेश किया । सीएम केजरीवाल भी इस दौरान सदन में मौजूद रहे।
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इस बिल के मौजूदा मसौदे को लेकर दिल्ली सरकार पर जमकर हमले हो रहे हैं। बिल का जहां आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव महाजोकपाल करार देते हुए विरोध कर रहे हैं।

वहीं भाजपा ने भी इसे जनता के साथ धोखा करार दिया है। जबकि दिल्ली सरकार ने इस आम जनता को शक्ति प्रदान करने वाला बिल बताया है।

दिल्ली सरकार के मुताबिक जनलोकपाल बिल 2015 दिल्ली में भ्रष्टाचार विरोधी कानून को नया रूप दिया गया है और यह बेहद मजबूत कानून है।

बिल के इन बिंदुओं पर है टकराव

नए जनलोकपाल बिल के दायरे में राजधानी में कार कर रहे सभी विभागों के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच जनलोकपाल करेगा, जिनमें केंद्र सरकार के दिल्ली पुलिस, डीडीए और एमसीडी जैसे विभाग भी शामिल है।

प्रशांत भूषण ने इस बिल के कई बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं। जिसमें लोकपाल की नियुक्ति, लोकपाल को हटाने का तरीका, सजा का प्रावधान और केंद्र सरकार से इसका टकराव प्रमुख है।

जनलोकपाल विधेयक में ये हैं खास प्रावधान
- बदनीयती और जानबूझकर शिकायत करने वालों को एक साल तक की सजा व एक लाख रुपये का होगा जुर्माना
- छह महीने में जांच पूरी करनी होगी, अधिकतम एक साल तक तारीख बढ़ाई जा सकेगी
- जनलोकपाल अभियोजन विंग बनाएगा, मुकदमा चलाने की अनुमति जनलोकपाल ही देगा
- कम से कम छह महीने की सजा होगी, जो 10 साल तक बढ़ाई जा सकेगी
- दुर्लभ मामलों में आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई जा सकेगी
- किसी व्यापारिक संस्थान को फायदा पहुंचाने से सरकारी खजाने को हुए नुकसान पर उक्त अधिकारी से पांच गुना जुर्माना वसूला जा सकेगा।

बिल से पहले जमकर हुआ हंगामा

दिल्ली सरकार द्वारा पेश किए जा रहे इस बहुप्रतीक्षित बिल को लेकर आज सदन की शुरूआत से ही विवाद और हंगामा देखने को मिला।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता को जबरन बाहर कर दिया गया था। विजेंद्र गुप्ता विधानसभा से निलंबित किए ओपी शर्मा के निलंबन का विरोध कर रहे थे। उन्होंने बाहर आकर मीडिया के सामने आप विधायकों पर गाली देने का आरोप भी लगाया।

विजेंद्र गुप्ता को मार्शलों ने विधानसभा से 4 बजे तक बाहर कर किया था। वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव भी विधानसभा के बाहर मोर्चा संभालने पहुंचे।

बताया गया कि मौजूदा लोकपाल बिल का विरोध कर रहे स्वराज अभियान के नेताओं और प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को हिरासत में भी लिया गया।
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माफी मांगने को लेकर अड़ी रही महिला विधायक

इतना ही नहीं महिला विधायक आज भी भाजपा की ओर से माफी मांगने की अपनी बात पर अड़िग रही। महिला विधायक हंगामा करते हुए वैल में आ गई थी।

आप महिला विधायकों का विरोध जारी रहा। बता दें कि ओपी शर्मा को इस सत्र के लिए निलंबित किया गया है तो वहीं सत्तापक्ष के विधायक पंकज पुष्कर भी सोमवार की बैठक के लिए निष्कासित थे।

सरकार ने सत्र विस्तार के पहले दिन एक नया बिल पेश करने के अलावा शिक्षा से जुड़े तीन बिलों पर चर्चा करने का फैसला किया है।

दिल्ली विद्यालय (लेखों की जांच और अधिक फीस वापसी) विधेयक, 2015, दिल्ली विद्यालय शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2015 और निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (संशोधन) विधेयक पर चर्चा होगी।
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