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लुटियंस की दिल्ली: अशोक रोड पर जामुन तो तीन मूर्ति पर मिलेगी इमली, अंग्रेजों ने बनाई थी इस तरह की कार्ययोजना

Wed, 04 May 2022 01:53 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लुटियंस दिल्ली की सड़कों पर एक ही प्रजाति के पेड़ लगे हैं। एक सड़क पर एक किस्म के पौधे लगाने की योजना आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार ने तैयार की थी। आज भी उसी कार्ययोजना पर दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) काम कर रही है।
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अशोक रोड पर लगे जामुन के पेड़ - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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इस बार पहली बारिश अगर आपको लुटियंस दिल्ली में जामुन खानी है तो राजाजी मार्ग व मोतीलाल नेहरू मार्ग और अशोक रोड, फिरोजशाह रोड व तुगलक रोड सरीखी सड़कों पर जाना बेहतर होगा। वहीं, अगर आपको इमली पसंद है तो तिलक मार्ग, बाबा खड़ग सिंह व तीन मूर्ति मार्ग पसंदीदा सड़क हो सकती है। इन सड़कों पर आपको जामुन व इमली आसानी से मिल जाएगी।

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दरसअल, लुटियंस दिल्ली की सड़कों पर एक ही प्रजाति के पेड़ लगे हैं। एक सड़क पर एक किस्म के पौधे लगाने की योजना आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार ने तैयार की थी। आज भी उसी कार्ययोजना पर दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) काम कर रही है। इसमें एक सड़क पर एक ही प्रजाति के पौधे लगाए जाते हैं। इससे पौधों की देख-रेख में सहूलियत रहती है। एक किस्म के पौधे होने से मिट्टी, खाद, कीटनाशक समेत देख-रेख की दूसरी चीजों में बदलाव नहीं करना पड़ता। 

एनडीएमसी अधिकारियों कहना है कि ब्रिटिश काल की कार्ययोजना में अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, मेट्रो की अंडरग्राउड लाइन डालने से कुछ सड़कों के किनारे दूसरी प्रजाति के पेड़ लगाने पड़े हैं। वजह यह कि मेट्रो की खुदाई के दौरान मिट्टी की प्रकृति में बदलाव आ गया है। ऊपर की मिट्टी नीचे और नीचे की मिट्टी ऊपर हो गई है। नतीजन इन सड़कों पर मिट्टी की सतह बदली है। इनमें मुख्य तौर पर मंडी हाउस चौक समेत रफी मार्ग, सिकंदर रोड, बाराखंबा रोड शामिल हैं। बाकी सड़कों पर अग्रेंजो के एक्शन प्लान पर काम हो रहा है।

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1911 में रखी गई थी नई दिल्ली की नींव

देश की राजधानी कोलकाता से दिल्ली से लाने के बाद अंग्रेजों ने 15 दिसंबर 1911 को नई दिल्ली की नींव रखी थी। 13 फरवरी 1931 को इसे तैयार कर लिया गया था। इस बीच नई दिल्ली में हरित क्षेत्र का भी विकास किया गया। इसमें सड़कों के किनारे पौधे लगाने की कार्ययोजना बनाई गई। इसके मुताबिक, एक सड़क पर एक ही प्रजाति के पौधे लगाए जाने थे। इस तरह नई दिल्ली में एक रोड के किनारे विभिन्न प्रकार के पेड़ नहीं, बल्कि एक रोड पर एक ही प्रकार के पेड़ लगे हुए है।

शुरुआत में ही आठ-दस किस्म के लगे थे पौधे
आठ-दस प्रकार के पौधे लगाए गए थे। इनमें नीम, जामुन, इमली, अर्जुन, पीपल, पिलखन, बहेड़ा आदि शामिल थे। छायादार होने के साथ इसमें से कई पौधे फल भी देते थे। इस वक्त इन सडृकों पर जब कभी आंधी समेत दूसरी वजहों से पेड़ टूट जाता है तो एनडीएमसी भी उसी किस्म के पौधे लगाती है, जिसके पहले थे। इसके अलावा संख्या बढ़ाने के लिए भी एनडीएमसी उसी प्रजाति के पौधे लगाती है।

पीपल ने कई जगह दूसरी किस्म के पेड़ों पर कब्जा किया
नई दिल्ली इलाके में भले ही एक रोड पर एक प्रकार के पेड़ों के पौधे लगाए जा रहे है, लेकिन कई रोड पर लगे जामून आदि पेड़ों पर पीपल ने कब्जा कर लिया है। इन पेड़ों के तने पर पीपल के पेड़ भी विकसित हो गए है।  
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सड़कों पर लगे पेड़ों का ब्योरा

नीम : पृथ्वीराज रोड, शाहजहां रोड, लोधी रोड, सफदरजंग रोड, डा. एपीजे अब्दुल कलाम रोड, कमालअतातुर्क मार्ग, अरविंदो मार्ग, संसद मार्ग, रेडक्रास रोड, कस्तूरबा गांधी मार्ग, तालकटोरा रोड एवं जंतर मंतर रोड।
जामुन : अशोक रोड, राजाजी मार्ग, मोतीलाल नेहरू मार्ग, फिरोजशाह रोड, तुगलक रोड एवं कृष्णा मेनन मार्ग और इंडिया गेट व बोट कल्ब।
इमली : तिलक मार्ग, अकबर रोड, बाबा खड़ग सिंह मार्ग एवं तीन मूर्ति मार्ग।
अर्जुन : जनपथ, पार्क स्ट्रीट, बाबा खड़ग सिंह मार्ग, तीन मूर्ति मार्ग एवं महर्षि रमन मार्ग।
पीपल : सरदार पटेल मार्ग, मंदिर मार्ग, मदर टरेसा क्रिसेंट एवं पंचशील मार्ग।
मौल श्री : सान मार्टिन मार्ग।
पिलखन : डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग एवं नीति मार्ग।
बहेडा : राजेंद्र प्रसाद रोड।
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