देश की राजधानी कोलकाता से दिल्ली से लाने के बाद अंग्रेजों ने 15 दिसंबर 1911 को नई दिल्ली की नींव रखी थी। 13 फरवरी 1931 को इसे तैयार कर लिया गया था। इस बीच नई दिल्ली में हरित क्षेत्र का भी विकास किया गया। इसमें सड़कों के किनारे पौधे लगाने की कार्ययोजना बनाई गई। इसके मुताबिक, एक सड़क पर एक ही प्रजाति के पौधे लगाए जाने थे। इस तरह नई दिल्ली में एक रोड के किनारे विभिन्न प्रकार के पेड़ नहीं, बल्कि एक रोड पर एक ही प्रकार के पेड़ लगे हुए है।
शुरुआत में ही आठ-दस किस्म के लगे थे पौधे
आठ-दस प्रकार के पौधे लगाए गए थे। इनमें नीम, जामुन, इमली, अर्जुन, पीपल, पिलखन, बहेड़ा आदि शामिल थे। छायादार होने के साथ इसमें से कई पौधे फल भी देते थे। इस वक्त इन सडृकों पर जब कभी आंधी समेत दूसरी वजहों से पेड़ टूट जाता है तो एनडीएमसी भी उसी किस्म के पौधे लगाती है, जिसके पहले थे। इसके अलावा संख्या बढ़ाने के लिए भी एनडीएमसी उसी प्रजाति के पौधे लगाती है।
पीपल ने कई जगह दूसरी किस्म के पेड़ों पर कब्जा किया
नई दिल्ली इलाके में भले ही एक रोड पर एक प्रकार के पेड़ों के पौधे लगाए जा रहे है, लेकिन कई रोड पर लगे जामून आदि पेड़ों पर पीपल ने कब्जा कर लिया है। इन पेड़ों के तने पर पीपल के पेड़ भी विकसित हो गए है।
नीम : पृथ्वीराज रोड, शाहजहां रोड, लोधी रोड, सफदरजंग रोड, डा. एपीजे अब्दुल कलाम रोड, कमालअतातुर्क मार्ग, अरविंदो मार्ग, संसद मार्ग, रेडक्रास रोड, कस्तूरबा गांधी मार्ग, तालकटोरा रोड एवं जंतर मंतर रोड।
जामुन : अशोक रोड, राजाजी मार्ग, मोतीलाल नेहरू मार्ग, फिरोजशाह रोड, तुगलक रोड एवं कृष्णा मेनन मार्ग और इंडिया गेट व बोट कल्ब।
इमली : तिलक मार्ग, अकबर रोड, बाबा खड़ग सिंह मार्ग एवं तीन मूर्ति मार्ग।
अर्जुन : जनपथ, पार्क स्ट्रीट, बाबा खड़ग सिंह मार्ग, तीन मूर्ति मार्ग एवं महर्षि रमन मार्ग।
पीपल : सरदार पटेल मार्ग, मंदिर मार्ग, मदर टरेसा क्रिसेंट एवं पंचशील मार्ग।
मौल श्री : सान मार्टिन मार्ग।
पिलखन : डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग एवं नीति मार्ग।
बहेडा : राजेंद्र प्रसाद रोड।