जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध प्रदर्शन पर केंद्र सरकार को कुल तीन रिपोर्ट भेजी हैं। पहली रिपोर्ट 13 दिसंबर को भेजी गई थी। इसके बाद 16 दिसंबर को ऑनलाइन मोड से ईमेल पर और तीसरी लिखित रिपोर्ट 17 दिसंबर को सौंपी है।
खास बात यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने सभी डीन व स्कूल चेयरपर्सन संग बैठक के बाद हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की जिम्मेदारी व निगरानी का जिम्मा शिक्षकों को सौंपा है। चार से पांच छात्रों के ग्रुप पर एक शिक्षक को तैनात किया गया है।
जामिया विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक, कुलपति, रजिस्ट्रार, चीफ प्रोक्टर की बुधवार को सभी विभागों के डीन, चेयरपर्सन व विभाग प्रमुख के साथ बैठक हुई।
बैठक में सीएए के विरोध के बीच विश्वविद्यालय के छात्रों की सुरक्षा की रणनीति पर चर्चा हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने फैसला लिया है कि पांच जनवरी तक विश्वविद्यालय की छुट्टियों के बाद भी घर नहीं जाने वाले छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षक उठाएंगे।
व्हाट्सएप, ट्विटर, फेसबुक व सभाओं पर नजर:
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों को छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप, ट्विटर, फेसबुक और सभाओं पर नजर रखने को कहा है। शिक्षकों से आग्रह किया गया है कि वे छात्रों से बात करते रहें।
साथ ही कहा गया है कि रविवार को कैंपस स्थित लाइब्रेरी में तोड़फोड़, लाठीचार्ज की घटना छात्रों के मन में बैठे डर को दूर करें। छात्र कैंपस परिसर में ही शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएं। बाहर आयोजित होने वाले धरना, मार्च, रैली, प्रदर्शन का हिस्सा न बनें।
बाहरी छात्रों को कैंपस परिसर या हॉस्टल में लेकर न आएं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर चलने वाली किसी भी अफवाह, वीडियो आदि पर भरोसा न करें। इससे पहले मंगलवार को सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों को छात्रों और कैंपस की निगरानी के आदेश दिए थे।