एफटीके-आईटी सभागार में एक भव्य समारोह आयोजित
- फोटो : अमर उजाला
लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया
पहला विश्वविद्यालय प्रणाली में डॉ. आंबेडकर का अध्ययन कैसे हो और वह राजनीतिक संदर्भों से कैसे भिन्न है? और दूसरा उन्हें केवल एक दलित मसीहा या संविधान निर्माता तक सीमित क्यों किया जाए? उन्होंने बताया कि आंबेडकर के चिंतन में ऐतिहासिक, तुलनात्मक और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण निहित है, जो आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। प्रो. दीक्षित ने संविधान की व्यापकता पर बात करते हुए कहा कि यह दस्तावेज केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और लोकतंत्र की रक्षा का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया।
डॉ. आंबेडकर ने अंधेरे में रोशनी फैलाई
मुख्य अतिथि आचार्य ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन इस बात का प्रतीक है कि कठिनाइयों के बीच भी सशक्त विचार और संकल्प कैसे परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने कहा, 'डॉ. आंबेडकर ने अंधेरे में रोशनी फैलाई और आज भी उनके विचार हमें दिशा देते हैं।' कार्यक्रम के अंत में कुलपति और कुलसचिव ने संविधान की मूल प्रतियां मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और मुख्य वक्ता को भेंट की।
एफटीके-आईटी सभागार में एक भव्य समारोह आयोजित
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कुलसचिव ने टीमों के योगदान की भी सराहना की
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कुलसचिव प्रो. महताब आलम रिजवी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण है कि वह इस तरह के ऐतिहासिक और प्रेरक आयोजन का साक्षी बना। उन्होंने डॉ. आंबेडकर के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक योगदान को रेखांकित करते हुए छात्रों से उनके विचारों को आत्मसात करने का आग्रह किया। उन्होंने आयोजन समिति के सदस्यों डॉ. कपिल देव, डॉ. राजवीर सिंह, डॉ. अरुणेश कुमार सिंह, प्रो. रविंस, डॉ. अमित कुमार वर्मा और डॉ. डोरी लाल के साथ-साथ एनसीसी, सुरक्षा, स्वच्छता, बागवानी तथा तकनीकी और प्रशासनिक टीमों के योगदान की भी सराहना की।
समारोह में जामिया के अधिकारी, डीन, विभागाध्यक्ष, केंद्र निदेशक, शिक्षकगण, विदेशी छात्र सलाहकार, पुस्तकालयाध्यक्ष, सुरक्षा सलाहकार और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।