सीएए और एनआरसी का विरोध करने बुधवार को जामिया मिल्लिया पहुंची जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर को भूलकर हम अपना आंदोलन नहीं जीत सकते। संविधान के साथ छेड़छाड़ की शुरूआत कश्मीर से ही शुरू हुई। ये कश्मीर के हक की लड़ाई है। हम इससे पीछे नहीं हट सकते हैं। वहां जो लोगों के साथ हो रहा है। वह गलत हो रहा है। हर मंच से हम उनके हक की बात करेंगे।
आइशी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण ही पूरे देश के लोग उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं। लगातार संविधान को बदलने की कोशिश की जा रही है। वह इसको कभी कामयाब नहीं होने देंगे।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में बुधवार को चलो जामिया नाम से छात्रों को बुलाने का आह्वान किया गया था। उसमें हिस्सा लेने के लिए आइशी घोष जामिया पहुंची थी। आइशी ने कहा कि जितना यह देश नेहरू और गांधी का है, उतना ती यह देश मौलाना अबुल कलाम आजाद अशफाक उल्लाह खान का भी है। हमें सावरकर और गोलवरकर का इतिहास नहीं पढ़ना है, इन्होंने अंग्रेजों से माफी मांगी थी। हमें राम प्रसाद बिस्मिल, भगतसिंह और अशफाक उल्लाह खान जैसे लोगों का इतिहास को पढ़ना है।
आइशी ने जेएनयू कैंपस में हुए बवाल के मामले में कहा कि वह पिछले 70 दिनों से शांति पूर्वक कैंपस में प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कुछ गुंडों ने हॉस्टल और कैंपस में घुसकर पुलिस की मिली भगत से लेफ्ट छात्रों को चुनचुनकर पीटा। कुछ को तो बालकनी से फेंक तक दिया गया। पुलिस के खिलाफ भी कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। आइशी ने कहा कि वह अपनी लड़ाई लगातार जारी रखेंगे। वह जामिया और एएमयू के साथ हैं।