सिंघु बॉर्डर पर कड़ाके की ठंड में किसानों का आंदोलन जारी है। उम्मीद और नाउम्मीदी के बीच कल सरकार और किसानों के बीच फिर से वार्ता का सत्र है। इस बीच किसानों के जान देने की खबरें भी आ रही हैं। इसी के साथ कुछ ऐसी खबरें भी देखने-सुनने को मिल रही हैं जो न सिर्फ रोचक हैं बल्कि हालात को भी बयां करती हैं।
सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन में आए जालंधर के एक किसान का मामला भी कुछ ऐसा ही है। उसे घर की याद आई तो उसने ट्रक को ही घर की शक्ल दे दी। उसक कहना है- मैं यहां लंगर सेवा के लिए 2 दिसंबर को आया था। मैंने अपना सारा काम छोड़ दिया और यहां बॉर्डर पर सात दिन सेवादारी की। घर की याद आने लगी तो ट्रक में ही घर बना लिया।
तय है बाद की रणनीति
कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर चार जनवरी को सरकार से होने वाली वार्ता में किसानों की मांगे पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि कृषि कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी गारंटी के लिए कानून की किसानों की मांग पूरी नहीं हुई तो छह जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।
इसके बाद सात जनवरी से 20 जनवरी के बीच सभी राज्यों में जागृति अभियान चलाएंगे। किसानों ने यह भी कहा कि इस मामले का समाधान निकलने तक पंजाब और हरियाणा के सभी टोल फ्र्री रहेंगे। उधर, किसानों ने पंजाब सरकार को किसानों ने गन्ने के मूल्य जबकि हरियाणा सरकार को भी चेतावनी दी है कि अगर किसानों की अनदेखी का सिलसिला नहीं थमा तो विरोध तेज होगा।
समर्थन में बौद्ध भिक्षु
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से नया साल किसानों के साथ मनाने की अपील के तहत सभी वर्ग के लोग शामिल हुए। टीकरी बॉर्डर पर पंजाब के बरनाला से किसान अपनी ट्रॉलियों के साथ पहुंचे। गाजीपुर सीमा पर पूर्व-सेवादारों ने किसानों की एकजुटता को प्रदर्शित करते हुए सफाई अभियान चलाया। खास बात यह रही कि नए साल पर किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु पहुंचे।