पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के जीवन का एक अहम भाग मरीजों की पीड़ा से भी जुड़ा था, जिसके बारे में वे न कभी सामाजिक मंच पर बोलते थे और न ही किसी से चर्चा करते थे। वे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाहर मरीजों की सेवा करते रहते थे।
करीब पांच साल पहले की बात है। वर्ष 2014 में पेट से जुड़े ऑपरेशन के लिए उन्हें एम्स में भर्ती होना पड़ा था। उस वक्त पहली बार जेटली ने एम्स के मरीजों और उनकी पीड़ा को इतने करीब से जाना। सर्दी-गर्मी में खुले आसमां के नीचे बेचैन लोगों को देख वे अक्सर मायूस हो जाते।
उनसे मिलने जो भी आता, वे उनसे अपने मन की बाता साझा करते थे। डिस्चॉर्ज होने के बाद जेटली ने कुछ लोगों की मदद से ‘सुख वर्षा समाज सेवा संस्था’ बनाई। इसी संस्था के अध्यक्ष वरीन्द्र मैनी बताते हैं कि मरीज बनकर जेटली ने रोगियों की पीड़ा को महसूस किया।
संस्था बनने के बाद एक वैन खरीदी गई। इस वैन में आज भी मरीजों के लिए भोजन, कंबल और पानी का वितरण किया जाता है। जेटली के मार्गदर्शन में संस्था से कई लोग जुड़े। 9 अगस्त से एम्स में जेटली भर्ती थे और बाहर उनके परिजन संस्था सदस्यों के साथ मिलकर भोजन करा रहे थे।
हर दिन उनके परिवार से जुड़ा कोई न कोई सदस्य साथ में होता था। संस्था के महामंत्री विनय महेन्द्रु बताते हैं कि शुक्रवार को एम्स परिसर में दाल चावल का वितरण किया था।
पेयजल की व्यवस्था करवाई
पिछले वर्ष किडनी प्रत्यारोपण को लेकर जब जेटली एम्स में भर्ती हुए उस वक्त भी उन्हें कार्डिएक न्यूरो सेंटर में रखा गया था। उस दौरान उन्हें पता चला कि मरीजों के लिए पेयजल का संकट है। कई मरीजों को तो उन्होंने स्वयं बोतलबंद पानी दिया था। डिस्चॉर्ज होने के बाद उन्होंने एम्स में शुद्ध पानी के लिए अलग से एक मशीन भी लगवाई थी।
सनातन मंदिर में कैशियर थीं मां
कई वर्षों से जेटली परिवार से जुड़े विनय महेन्द्रु बताते हैं कि जेटली की माता रतन प्रभा जेटली बहुत धार्मिक थीं। वे रोज नारायणा विहार स्थित सनातन धर्म मंदिर आया करती थीं। यहां के कैशियर की जिम्मेदारी वे ही संभालती थीं। इसके अलावा उन्होंने महिला मंडली भी बनाई थी। सत्संग में उनकी रुचि थी। इसीलिए उनके जाने के बाद जेटली ने सनातन धर्म मंदिर में काफी विकास कार्य कराए।