दिल्ली से सटे गाजियाबाद के उद्योग और कारोबार को गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के ऑक्सीजन की जरूरत है। दिल्ली और यूपी के टैक्स स्लैब में भारी अंतर होने का खामियाजा गाजियाबाद के कारोबारी और जनता के साथ ही सरकार को भी उठाना पड़ रहा है।
कारोबारी जहां दिल्ली से कीमतों की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं, वहीं जनता को महंगी वस्तुएं खरीदनी पड़ती हैं। व्यापारी टैक्स बचाने की कोशिश करते हैं।
इससे सरकार के राजस्व को भी नुकसान होता है। टैक्स की मार के चलते ही गाजियाबाद से सैकड़ों उद्योग अन्य राज्यों की ओर पलायन कर गए हैं।
दो प्रदेशों के बीच जिस तरह से टैक्स की असमानता है, उसमें उद्यमी और व्यापारियों को करोड़ों रुपये का फटका लगता है। असमान वैट की दरों के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के पेट्रोल पंप बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं।
मशीनरी उद्योग, आयरन स्टील की कंपनियों को बाहर से ऑर्डर नहीं मिल पाते। ऐसे में शहर के उद्यमियों, व्यापारियों, जनता ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से जीएसटी लागू करने की उम्मीद लगाई है।
जीएसटी लागू होने से टैक्स की असमानता खत्म हो जाएगी। उद्योगों का पलायन रुकेगा और गाजियाबाद एक बार फिर औद्योगिक नगरी के रूप में उभरेगा।
टैक्स की मार से राहत मिलेगी तो निश्चित तौर टैक्स की चोरी भी रुकेगी। एक तरफ राजस्व का नुकसान होता है तो दूसरी ओर महंगाई बढ़ती है। एक समान टैक्स व्यवस्था लागू होेने पर यह सब खत्म हो जाएगा। - तिलक राज अरोड़ा, व्यापारी