हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली मानहानि मामले में जल्द सुनवाई के खिलाफ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल वआप नेता आशुतोष की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा यह याचिका विचार योग्य ही नहीं है। जेटली ने 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा दायर किया हुआ है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी.हरिशंकर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा दायर याचिका में कोई तथ्य नहीं दिए गए और न ही कोई आधार है। ऐसे में याचिका विचारयोग्य नहीं है।
खंडपीठ ने कहा अदालत हर मामले में जल्द सुनवाई का प्रयास करती है और सभी मामलों का जल्द निपटारा करने का आदेश दिया जाता है।
हाईकोर्ट को भी देरी के लिए देना पड़ता है जवाब
दिल्ली उच्च न्यायालय
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हाईकोर्ट ने हाल ही में जल्द सुनवाई के मुद्दे पर संबंधित जज के निर्णय पर सवाल उठाने पर मुख्यमंत्री केजरीवाल व आशुतोष को फटकार लगाई थी।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि हमें किसी भी केस की सुनवाई में देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट को जवाब देना पड़ता है। यह हमारी ड्यूटी है कि किसी भी केस की सुनवाई में देरी न हो। हम यह पहली बार सुन रहें हैं कि कोई अपने मामले की सुनवाई में तेजी लाए जाने पर परेशान है।
गत 26 जुलाई को हाईकोर्ट के सिंगल जज मनमोहन ने मामले की सुनवाई में तेजी लाने का आदेश दिया था। केजरीवाल व आप नेता आशुतोष ने इसी आदेश को चुनौती दी है।
'याची केवल मामले की सुनवाई में देरी करता चाहता है'
याची के वकील ने तर्क रखा था कि जिरह व बयानों को दर्ज करने के दौरान मामले में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। जेटली के वकील संदीप सेठी ने कहा कि याची केवल मामले की सुनवाई में देरी करता चाहता है।
गौरतलब है कि जेटली ने केजरीवाल समेत पांच अन्य आप नेताओं पर 10 करोड़ का सिविल मानहानि मामला दायर किया हुआ है। जेटली के अनुसार आप नेताओं ने उन पर दिल्ली एंड डिस्ट्रिक क्रिकेट एसोसिशन में अध्यक्ष रहते भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
इसके अलावा आप नेताओं ने सोशल मिडिया पर उनके परिवार के बारे में भी गलत बयानी की। जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इसी मामले की सुनवाई में केजरीवाल के वकील रहे रामजेठमलानी द्वारा जेटली को अपशब्द कहने का आरोप लगा।