इस बीच जैकी ने बताया कि जागरूकता और परीक्षणों के कारण उनकी बेटी कृष्णा को इस बीमारी से ग्रस्त होने से बचाया गया था।
सरकार दवाओं की कीमतों को कम करने व बीमारी की रोकथाम के लिए कदम उठाए। एक सवाल के जवाब में डॉ. डी. एस. राणा ने कहा कि उनके यहां 1986 से थैलेसीमिया की इकाई काम कर रही है। बाल चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. वी के खन्ना ने बताया कि लगभग 3.4 फीसदी लोग थैलेसीमिया ग्रस्त हैं।
जबकि करीब 10 हजार बच्चे भारत में हर साल थैलेसेमिया प्रमुख के साथ पैदा होते हैं। यह मेजर एक ऑटोसोमल रीसेसिव रक्त विकार है जो माता-पिता से जीन के माध्यम से बच्चों में स्थानांतरित हो जाता है।