जाट आंदोलन से गुड़गांव में चल रहे बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के कार्य पर भी असर पड़ा है। कारोबारियों का कहना है कि गुड़गांव में बेची जाने वाली 80 फीसदी सीमेंट झाड़ली (झज्जर) से आपूर्ति होती है।
जब से जाट आंदोलन आरंभ हुआ है तब से सीमेंट की आवक गुड़गांव में बुरी तरह प्रभावित है। इससे शहर में तेजी से चलने वाला कंस्ट्रक्शन कार्य काफी मंद पड़ गया है।
सोहना रोड पर चल रहे एक प्रोजेक्ट को पूरा करने के काम में जुटे अभिषेक दयाल का कहना है कि सीमेंट नहीं मिलने से काम की गति मंद हो गई है। जो सीमेंट बैकअप में रखी गई थी अब वह भी खत्म हो गई है।
बसई चौक पर जेके लक्ष्मी सीमेंट स्टॉकिस्ट अनु अरोड़ा का कहना है कि जाट आंदोलन के कारण सीमेंट के भाव बढ़ गए हैं। जो सीमेंट 220 रुपये बोरी बिक रहा था अब उसका भाव 250 रुपये प्रति बोरी हो गया है।
हैपनिंग हरियाणा की सताने लगी फिक्र
उन्होंने कहा कि जाट आंदोलन ऐसे ही चलता रहा तो जल्द ही सीमेंट प्रति बोरी 300 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा। खंडेलवाल स्टील के संचालक परमिल खंडेलवाल का कहना है आरक्षण आंदोलन के कारण सीमेंट की आवक नहीं हो पा रही है।
आरक्षण की मांग को लेकर रोहतक से शुरू हुए जाटों का आंदोलन गुड़गांव पहुंचने से प्रदेश सरकार की माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
मनोहर सरकार को साइबर सिटी में 7 से 9 मार्च तक आयोजित होने वाले हैपनिंग हरियाणा की फिक्र सता रही है। सूत्रों का मानना है कि जाट आंदोलन विदेशी निवेश में रोड़ा साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कृषि मंत्री को भेजा गुड़गांव
सूत्रों की मानें तो बृहस्पतिवार को आंदोलन शुरू होने के बाद से ही साइबर सिटी पर सरकार के आला अधिकारी की नजर थी, लेकिन शुक्रवार को इसका दायरा बढ़ने की खबर आते ही जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव को इस बारे में सूचना दी गई।
जिसके बाद से ही मुख्यमंत्री पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। गुड़गांव में 15 जगहों पर आंदोलन की खबर पर मुख्यमंत्री के आदेश पर कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ को गुड़गांव भेजा गया। उन्होंने जाटों से आंदोलन खत्म करने की अपील की।
बता दें कि गुड़गांव में 7 से 9 मार्च को हैपनिंग हरियाणा का आयोजन किया जा रहा है। जिसके जरिये विदेशी निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए राजी करना और उन्हें नए उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित करना है।
औद्योगिक हब में अशांति बनी चुनौति
09 मार्च को होने वाले प्रवासी दिवस के जरिये हरियाणा के बाहर के उद्योगपतियों पर खास ध्यान है, लेकिन प्रदेश में जाट आंदोलन और इससे हो रही अव्यवस्था ने सरकारी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
उद्योगपतियों का कहना है कि अगर इसी तरह से माहौल रहा तो प्रदेश में निवेश करना मुश्किल हो जाएगा, हाल ही में मुख्यमंत्री चीन, जापान, कनाडा समेत अन्य देशों का दौरा कर वहां के निवेशकों को आमंत्रित करके आए थे।
वहीं, पहले से साइबर सिटी के औद्योगिक हब में अशांति सरकार के लिए चुनौति बनी हुई है।