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एमसीडी हार तो कुछ नहीं, मई में केजरीवाल पर होगा अस्तित्व बचाने का संकट

Thu, 27 Apr 2017 03:50 PM IST
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरविंद केजरीवाल
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पंजाब और गोवा में मिली करारी हार के बाद आम आदमी पार्टी को एमसीडी में भी शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन आप के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होने जा रहीं बल्कि इन हारों से भी बड़ा खतरा अभी आम आदमी पार्टी के सिर पर मंडरा रहा है और इसका फैसला मई में होगा कि यह खतरा टलेगा या रहेगा।
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हम जिस खतरे की बात कर रहे हैं उससे आम आदमी पार्टी की सरकार भी गिर सकती है। दरअसल मई में चुनाव आयोग 'आप' के 21 विधायकों को अयोग्य घोषित करने वाले मामले में फैसला सुना सकती है। ऐसे में अगर चुनाव आयोग 21 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश कर देता है तो केजरीवाल को एक बार फिर चुनाव की तैयारी करनी पड़ सकती है।

यही नहीं आशंका तो यह भी है कि फिर कुछ बागी विधायक दूसरी पार्टी में मिलकर नई सरकार भी बना सकते हैं।

अस्तित्व बचाने सहित सही दिशा पकड़कर चलने की भी चुनौती

केजरीवाल - फोटो : सोशल मीड‌िया
मोदी लहर ने भाजपा को तीनों नगर निगम में फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता दिला तो दी लेकिन आम आदमी पार्टी के सामने दशा व दिशा को लेकर संकट पैदा हो गया है। आगामी समय में आप सरकार पर खतरे की संभावनाओं के बीच उसके सामने अपना अस्तित्व बचाने सहित सही दिशा पकड़कर चलने की भी चुनौती होगी।

दूसरी ओर तीनों नगर निगमों में भाजपा के क्लीन स्वीप के बीच मनोज तिवारी ने अपनी लकीर काफी बड़ी कर दी है। कांग्रेस के पास खोने जैसी स्थिति नहीं थी लेकिन पिछले नगर निगम चुनावों से तुलना करें तो उसे नुकसान हुआ है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के बाद राजनीति में आई आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2013 के चुनाव में 28 सीटें जीती थीं। सरकार छोड़ने के बाद वर्ष 2015 के चुनाव में उसे 70 में से 67 सीटें मिलीं।

इससे पूर्व लोकसभा चुनाव में उसे कोई सीट तो नहीं मिली लेकिन मतदान प्रतिशत संतोषजनक रहा। कुल मिलाकर आप के अभी तक लड़े सभी चुनावों में नगर निगम चुनावों में यह उसका सबसे कम मत प्रतिशत रहा है।

21 विधायक लाभ के पद मामले में फंसे हैं

kejriwal
इस परिणाम के बाद अब आप के सामने आने वाले समय में सरकार बचाने का खतरा बना रहेगा। उसके 21 विधायक लाभ के पद मामले में फंसे हैं और उनकी सदस्यता पर खतरा है।

करीब आधा दर्जन से अधिक विधायक आप में रहते हुए भी बगावत कर चुके हैं, कुछ अन्य विधायक भी विरोधी स्वर के चलते सुर्खियों में है। इस हार के बाद उसके कुछ बड़े नेताओं के सुर भी अलग-अलग हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस जीत से उत्साहित भाजपा कोई भी राजनीतिक दांव चल सकती है, जिससे उसकी सरकार पर भी खतरा मंडरा सकता है। दूसरा संकट आप के सामने दिशा तय करने को लेकर भी है।

जानकारों का मानना है कि एमसीडी में केजरीवाल का मुकाबला विजेंद्र गुप्ता से होने के पोस्टर लगाने, भाजपा के जीतने पर डेंगू व चिकनगुनिया फैलने व ईवीएम पर हार का दोष मढ़ना भी वोटरों के बीच आप के खिलाफ गया। ऐसे में आगे की सही दिशा भी पार्टी का भविष्य तय करेगी।
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विधानसभा चुनाव की तैयारियों में अब वह जुट जाएंगेः मनोज त‌िवारी

एमसीडी इलेक्शन में भाजपा की जीत - फोटो : कुमार संजय
दूसरी ओर भाजपा के पूर्वांचली चेहरे के रूप में प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद मनोज तिवारी का कद काफी बढ़ गया है, हालांकि भाजपा ने यह चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही लड़ा था। यही कारण है कि उसने मौजूदा पार्षदों के टिकट काटने सहित कई तरह के नए प्रयोग कर हैवी रिस्क भी लिया।

प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में अब वह जुट जाएंगे। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अजय माकन ने इस चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा जरूर दे दिया है लेकिन कांग्रेस के विधानसभा व लोकसभा चुनाव के मुकाबले कुछ पाया ही है। कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर काफी बदलाव व मेहनत करनी होगी।

पिछले तीन चुनावों में किसकी क्या रही थी स्थिति

दिल्ली विधानसभा चुनाव:
वर्ष         कांग्रेस            भाजपा      आप
2013        24.55         33.07       29.49 
2015         9.8           32.02       54.30

लोकसभा चुनाव:
2014       15.1             46.4         32.9

नगर निगम चुनाव:
2017        21.09           36.08       26.23
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