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देश में पहली बार होगा ऐसा कि स्टील के ब्रिज पर दौड़ेगी मेट्रो

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देश में पहली बार कंक्रीट की बजाय स्टील के ब्रिज पर मेट्रो ट्रेन दौड़ेगी। दिल्ली मेट्रो के इंजीनियरों को देश में पहला स्टील ब्रिज बनाने में सफलता मिल गई है।
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नोएडा/वैशाली से द्वारका की ओर जाने वाली ब्लू लाइन के ऐलिवेटेड ट्रैक के नीचे शिव विहार-मजलिस पार्क के बीच निर्माणाधीन ब्राउन लाइन को रिंग रोड पार करवाने के लिए इंजीनियरों ने स्टील ब्रिज बनाया है।

छह दिनों में 60 मीटर लंबा ब्रिज दिल्ली के सबसे बिजी रिंग रोड पर रात के दौरान बनाया गया। राजौरी गार्डन इंटरचेंज पर यात्रियों को पहला ट्रैवलेटर भी मिलेगा।
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पिलर बनाने की जगह नहीं थी तो बनाया स्टील ब्रिज

मेट्रो फेज थ्री के तहत राजौरी गार्डन के पास रिंग रोड पर शिव विहार से मजलिस पार्क के बीच निर्माणाधीन ब्राउन लाइन को पार करवाना था। हालांकि यहां पहले से रिंग रोड पर द्वारका सेक्टर 21 से नोएडा / वैशाली की ओर जाने वाली ब्लू लाइन का ऐलिवेटेड ट्रैक था।

यहां पर ब्राउन लाइन को अंडरग्राउंड नहीं किया जा सकता था। क्योंकि यहां रिंग रोड के नीचे अंडरपास है। रिंग रोड पर पहले से ऐलिवेटेड ट्रैक होने के चलते निर्माणाधीन लाइन के पिलर बनाने की जगह नहीं थी।

ऐसे में दिल्ली मेट्रो के इंजीनियर ने इस रूट पर स्टील स्पैन की मदद से स्टील ब्रिज बनाने का निर्णय लिया। हालांकि चुनौतियां कम नहीं थीं, क्योंकि रिंग रोड सबसे व्यस्त मार्ग है। इसके चलते मेट्रो इंजीनियर ने रात को ट्रैफिक डायवर्ट करते हुए काम पूरा किया।
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छह दिनो में बना दिया 60 मीटर लंबा ब्रिज

छह दिनों में 60 मीटर लंबा स्टील ब्रिज तैयार करने में 350 मीट्रिक टन स्टील का प्रयोग हुआ। स्टील के इस ब्रिज के विभिन्न हिस्से और पुर्जे निर्माण स्थल पर लाकर जोड़े गए।

यहां रिंग रोड पर एक ओर 157 नंबर पिलर और दूसरी तरफ 156 नंबर पिलर है। राजौरी गार्डन इंटर सेक्शन की ओर से ब्रिज को पुश किया गया। इस स्टील ब्रिज को वास्तविक स्थान तक पहुंचाने के लिए लगभग 60 मीटर तक पुश किया गया।

यह काम 11 से शुरू होकर 17 अगस्त तक चला। इसे जोड़ने के लिए 12 हिलमैन रोलर प्रयोग किए गए। जिसमें प्रत्येक की क्षमता 200 मिलियन टन है। इसके अलावा दो हाइड्रोलिक जैक इस लॉन्चिंग कार्य को पूरा करने में शामिल किए गए, जिनकी क्षमता 50 मिलियन टन है। ब्रिज को जोड़ने के दौरान रिंग रोड पर यातायात मार्शल भी तैनात किए गए थे।
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