प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के निर्णय को देशभर की आईटी व सॉफ्टवेयर कंपनियां अपने लिए बड़ा अवसर मान रही हैं। उनका मानना है कि कैशलेस सोसायटी से इस सेक्टर को सबसे अधिक फायदा होगा, क्योंकि कैशलेस लेनदेन का सबसे बड़ा माध्यम ऑनलाइन सिस्टम होगा।
इसके लिए सॉफ्टवेयर के साथ-साथ आईटी डिवाइस की डिमांड में तेजी आएगी। यही मांग इस सेक्टर के कारोबार को भारी ग्रोथ देने वाली साबित होगी। यही बात आईटी व सॉफ्टवेयर सेक्टर को काफी उत्साहित कर रही है।
गुरुग्राम स्थित आईटी कंपनी प्रॉसेस-9 के सीईओ राकेश कपूर ने बताया कि नोटबंदी आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए बड़ा अवसर लेकर आई है। तात्कालिक तौर पर इस अवसर की पहचान करना थोड़ी मुश्किल है, मगर लांग टर्म (दूरगामी) में यह काफी फायदेमंद होने वाला है।
इससे आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों को काफी ग्रोथ मिलेगी। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जिस प्रकार से कैशलेस सोसायटी की बात की जा रही है, उससे आने वोल दिनों में नए-नए सॉफ्टवेयर की डिमांड होगी। गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर कंपनी नगारो के सीईओ डॉ. मानस फुलोरिया ने कहा कि नोटबंदी के निर्णय का काफी दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।
कैशलेस होने में थोड़ा समय लगेगा, पर यह बिल्कुल सही है कि जैसे-जैसे देश कैशलेस की ओर बढ़ता जाएगा, इसका लाभ आईटी व सॉफ्टवेयर कंपनियों को मिलेगा। डेटा सिक्योरिटी की भी जरूरत होगी।
डोमेस्टिक मार्केट से भी मिलेगा काम
गुरुग्राम ही नहीं देशभर की आईटी व सॉफ्टवेयर कंपनियों को वैश्विक आउटसोर्सिंग के जरिये काम मिलता है। विदेश से होने वाले कारोबार का करीब 90 फीसदी अमेरिका व यूरोप का होता है, मगर नोटबंदी के बाद कैशलेस सिस्टम की बात हो रही है। ऐसा होने से डोमेस्टिक मार्केट में भी आईटी डिवाइस व सॉफ्टवेयर की डिमांड बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा इस क्षेत्र की कंपनियों को होगा।